##plugins.themes.classic.volume-abbr## 44, ##plugins.themes.classic.number-abbr## 3 (2024): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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भारतीय आधुनिक शिक्षा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (रा.शै.अ.प्र.प.) की त्रैमासिक पत्रिका है, जो यूजीसी की केयर (Consortium for Academic and Research Ethics – CARE) पत्रिकाओं की सूची में सूचीबद्ध है।
यह पत्रिका शिक्षाविदों, शैक्षिक प्रशासकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थी-शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को विद्यालयी शिक्षा एवं अध्यापक शिक्षा पर अपने मौलिक शैक्षिक विचार प्रस्तुत करने का एक मंच प्रदान करती है।
लेखकों द्वारा भेजे गए सभी लेखों, शोधपत्रों, पुस्तक समीक्षाओं आदि का प्रकाशन से पूर्व समकक्ष विद्वानों द्वारा पूर्ण निष्पक्षता के साथ पुनरीक्षण (Peer Review) किया जाता है।
इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा एवं अध्यापक शिक्षा के विभिन्न आयामों में, विशेषकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में, गुणवत्ता को बढ़ावा देना है।
भारतीय आधुनिक शिक्षा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (रा.शै.अ.प्र.प.) की त्रैमासिक पत्रिका है, जो यूजीसी की केयर (Consortium for Academic and Research Ethics – CARE) पत्रिकाओं की सूची में सूचीबद्ध है। यह पत्रिका शिक्षाविदों, शैक्षिक प्रशासकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थी-शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को विद्यालयी शिक्षा एवं अध्यापक शिक्षा पर अपने मौलिक शैक्षिक विचार प्रस्तुत करने का एक मंच प्रदान करती है। लेखकों द्वारा भेजे गए सभी लेखों, शोधपत्रों, पुस्तक समीक्षाओं आदि का प्रकाशन से पूर्व समकक्ष विद्वानों द्वारा पूर्ण निष्पक्षता के साथ पुनरीक्षण (Peer Review) किया जाता है। इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा एवं अध्यापक शिक्षा के विभिन्न आयामों में, विशेषकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में, गुणवत्ता को बढ़ावा देना है। इस पत्रिका का एक अन्य उद्देश्य मौलिक एवं समीक्षात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करना भी है। लेखकों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उनके अपने हैं। अतः ये किसी भी प्रकार से परिषद की नीतियों या संपादकीय समिति के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। © 2025*. पत्रिका में प्रकाशित लेखों के सर्वाधिकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के पास सुरक्षित हैं। परिषद की पूर्व अनुमति के बिना लेखों का पुनर्मुद्रण किसी भी रूप में मान्य नहीं होगा।