Vol. 44 No. 3 (2024): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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अध्यापकों की समान और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने में भूमिका

प्रिया शर्मा
कनिष्ठ परियोजना सहायक, अध्यापक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली 110016
अंकिता
कनिष्ठ परियोजना सहायक, अध्यापक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली 110016

Published 2026-07-14

How to Cite

शर्मा प., & अंकिता. (2026). अध्यापकों की समान और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने में भूमिका. भारतीय आधुनिक शिक्षा, 44(3), p.44-51. https://doi.org/10.64742/nq5dr617

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Abstract

समावेशी शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा प्रणाली में लागू करना तथा नए प्रयासों द्वारा समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना, अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और उच्च स्तर तक ले जाने में अध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन्हीं सब पर ध्यान केंद्रित करते हुए सरकार द्वारा विद्यालय में समावेशी शिक्षा प्रदान करने हेतु कई नीतियाँ एवं नियम लागू किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं— शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, समग्र शिक्षा योजना आदि। इन नीतियों एवं नियमों पर अध्यापकों द्वारा ध्यान दिया जाना आवश्यक है। इन नियमों तथा योजनाओं द्वारा हम 74 प्रतिशत साक्षरता को प्राप्त कर चुके हैं, परंतु आज भी विद्यालय में अध्यापकों के सामने कई समस्याएँ आती हैं, जैसे— भेदभाव, दिव्यांगता, जाति, भाषा एवं निम्न सामाजिक-आर्थिक स्तर आदि। इन्हीं सब मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इस लेख द्वारा अध्यापकों के लिए कुछ मुख्य सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। इस लेख में ‘समान और समावेशी शिक्षा’ हेतु अध्यापकों की भूमिका के विषय में चर्चा प्रस्तुत की गई है।