Vol. 44 No. 3 (2024): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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महिलाओं के लिए सांस्कृतिक उद्यमिता और कौशल विकास की पहल: तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

रश्मि कुमारी राजौरा
शोधार्थी, अध्यापक शिक्षा विभाग, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ 123031
रेणु यादव
असिस्टेंट प्रोफे सर, अध्यापक शिक्षा विभाग, हरियाणा केन्द्रीय विश्‍वविद्यालय, महेंद्रगढ़ 123031

Published 2026-07-14

How to Cite

राजौरा र. क., & यादव र. (2026). महिलाओं के लिए सांस्कृतिक उद्यमिता और कौशल विकास की पहल: तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम. भारतीय आधुनिक शिक्षा, 44(3), p.95-109. https://doi.org/10.64742/eb6eze66

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Abstract

सांस्कृतिक उद्यमिता, उद्यमिता का एक प्रकार है, जो व्यावसायिक नवाचार के सांस्कृतिक रूपों पर ध्यान केंद्रित करती है तथा सांस्कृतिक उत्पादों और सेवाओं के निर्माण, प्रसार एवं व्यावसायीकरण की सुविधा प्रदान करती है। तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टी.वी.ई.टी.) कार्यक्रम आर्थिक स्वतंत्रता के लिए महिलाओं को कौशल और ज्ञान प्रदान करने के महत्वपूर्ण उपकरण बन गए हैं। जब सांस्कृतिक उद्यमिता के साथ उन्हें एकीकृत किया जाता है तो ये कार्यक्रम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए, अपनी सांस्कृतिक विरासत का उपयोग करने के लिए नवाचारी दृष्टि प्रदान करते हैं। यह लेख टी.वी.ई.टी. कार्यक्रमों में सांस्कृतिक उद्यमिता के महत्व और कौशल विकास पर प्रकाश डालता है, जिससे आर्थिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संरक्षण, जेंडर समानता और सतत विकास होता है। यह दृष्टिकोण युवाओं, विशेष रूप से महिलाओं को लाभान्वित करता है और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.) क्षेत्र को बढ़ावा देता है, तथा हितधारकों के बीच एक साझा जिम्मेदारी पर बल देता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ संरेखित करते हुए टी.वी.ई.टी. कार्यक्रमों में सांस्कृतिक उद्यमिता को एकीकृत करने की अनुशंसा की गई है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समग्र शिक्षा, कौशल विकास और व्यावसायीकरण पर बल देता है। अंत में, टी.वी.ई.टी. कार्यक्रमों में सांस्कृतिक उद्यमिता को एकीकृत करना महिलाओं को सशक्त बनाने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए एक आशाजनक मार्ग प्रदान करता है।