Vol. 49 No. 4 (2025): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा — बुनियादी स्तर 2022 में शिक्षण विधियाँ

रमन कनौजिया
पीएच.डी. शोधार्थी, शिक्षाशास्त्र विभाग, शिक्षा संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007
सुमित गंगवार
सहायक आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग, शिक्षा संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007

Published 2026-07-13

How to Cite

कनौजिया र., & गंगवार स. (2026). राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा — बुनियादी स्तर 2022 में शिक्षण विधियाँ. प्राथमिक शिक्षक, 49(4), p.5-18. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5326

Abstract

भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तुत सतत विकास एजेंडा के लक्ष्य 4 (एस.डी.जी. 4) में परिलक्षित सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा को सुनिश्चित करना तथा जीवन-पर्यंत शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा देना है।

इस लक्ष्य की प्राप्ति तथा 21वीं सदी की नवीन आवश्यकताओं के अनुरूप भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रस्तुत किया है। इस शिक्षा नीति के सिद्धांतों को वर्तमान विद्यालयी व्यवस्था में समाहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2022 में शिक्षा के बुनियादी स्तर के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा का निर्माण किया गया।

जिसका मुख्य उद्देश्य 3 से 8 वर्ष की आय के बच्चों के लिए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन तथा परिमार्जन करना है, ताकि उनके समग्र विकास की नींव रखी जा सके।

इस शोध-पत्र का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा— बुनियादी स्तर 2022 में वर्णित शिक्षण विधियों का अन्वेषण करना है। जिसके लिए शोधार्थी द्वारा इस दस्तावेज का विषयवस्तु विश्लेषण करने के उपरांत परिणाम के रूप में यह पाया गया कि इस दस्तावेज में बुनियादी स्तर के विद्यार्थियों के लिए खेल-आधारित शिक्षण विधियों पर बल दिया गया है।

इसके अंतर्गत बातचीत, कहानी, खिलौने, गीत-संगीत, शारीरिक गतिविधियाँ, कला एवं शिल्प, इनडोर-आउटडोर खेल, प्रकृति से जुड़ाव और क्षेत्र भ्रमण जैसी गतिविधियों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।

इन आनंदपूर्ण गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने के अवसर मिलते हैं तथा उनमें जिज्ञासा, रचनात्मकता और समस्या-समाधान जैसी क्षमताओं का विकास हो पाता है।

इस शोध-पत्र के अध्ययन के उपरांत प्राथमिक स्तर पर कार्यरत अध्यापक कक्षागत एवं कक्षा के बाहर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में इन शिक्षण विधियों को समाहित करके एक ऐसे समावेशी, न्यायसंगत एवं विद्यार्थी-केंद्रित वातावरण का निर्माण कर सकेंगे, जहाँ पर प्रत्येक विद्यार्थी आनंदपूर्वक नवीन ज्ञान को सीख सके।