Vol. 48 No. 3 (2024): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा — बुनियादी स्तर 2022 का ज्ञानमीमांसीय विश्लेषण

अनिल कुमार
पीएच.डी. शोधार्थी, शैक्षिक अध्ययन विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली – 110025
सुमित गंगवार
सह-आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007

Published 2026-07-13

How to Cite

कुमार अ., & गंगवार स. (2026). राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा — बुनियादी स्तर 2022 का ज्ञानमीमांसीय विश्लेषण. प्राथमिक शिक्षक, 48(3), p.5-11. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5490

Abstract

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुभाग 1.1 में निर्धारित लक्ष्य — “प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के सार्वभौमिक प्रावधान को यथाशीघ्र प्राप्त किया जाना चाहिए” — की प्राप्ति के लिए 3–8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों हेतु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा — बुनियादी स्तर (NCF-FS 2022) का विकास किया गया है।

प्रस्तुत शोध लेख में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के इसी सार्वभौमिक प्रावधान को दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—बुनियादी स्तर 2022 का ज्ञानमीमांसात्मक विश्लेषण किया गया है। इस पाठ्यचर्या के निर्माण में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के क्षेत्र में हुए व्यापक वैश्विक अनुसंधानों, भारत की समृद्ध परंपराओं तथा प्रमुख नवीन पहलों, जैसे— निपुण भारत, विद्या प्रवेश और बालवाटिका आदि को समुचित स्थान दिया गया है।

इस रूपरेखा में बुनियादी स्तर के लिए निर्धारित विषयवस्तु, शिक्षणशास्त्र के सिद्धांतों, अधिगम की प्रकृति तथा ज्ञान के आकलन के लिए अपनाई जाने वाली विभिन्न विधियों पर विस्तार से चर्चा की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों के समग्र विकास, खेल-आधारित अधिगम, अनुभवात्मक शिक्षण तथा बहुआयामी विकास को किस प्रकार प्रोत्साहित किया जा सकता है।

इस शोध लेख के अध्ययन के उपरांत विद्यालयी स्तर, विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर अध्यापन करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—बुनियादी स्तर 2022 के शिक्षणशास्त्रीय आधारों एवं ज्ञानमीमांसीय दृष्टिकोण की सम्यक् जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इसके माध्यम से वे अपनी कक्षाओं की अधिगम पारिस्थितिकी का पुनर्निर्माण करने में सक्षम होंगे तथा बच्चों के लिए अधिक समावेशी, आनंदमय, सहभागितापूर्ण और प्रभावी अधिगम वातावरण विकसित कर सकेंगे।

फलस्वरूप, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—बुनियादी स्तर 2022 की उस मूल अभिधारणा को साकार किया जा सकेगा, जिसके अनुसार “भारत के सभी बच्चों के लिए बाल्यावस्था और अधिगम का पारिस्थितिकी तंत्र विश्व में सर्वश्रेष्ठ हो।” इस प्रकार शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निर्धारित प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।