Vol. 46 No. 4 (2022): प्राथमिक शिक्षक
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कुपोषण पर प्रहार शिक्षकों की भूमिका

अनिल कुमार तेवतिया
प्रधानाचार्य, मण्डलीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, दिलशाद गार्डन, दिल्ली 110 095

Published 2026-07-13

How to Cite

तेवतिया अ. क. (2026). कुपोषण पर प्रहार शिक्षकों की भूमिका. प्राथमिक शिक्षक, 46(4), p.44-51. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5552

Abstract

भारत में कुपोषण की समस्या चिंताजनक स्तर पर रही है और इसके ऋणात्मक प्रभाव स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में साफ दिखाई देते रहे हैं। देश-विदेश में हुए विभिन्न अध्ययनों से इस बात का समर्थन होता है कि बेहतर पोषण वाले बच्चे, कुपोषित बच्चों की तुलना में, स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। पोषण का बच्चों की अनुभूतियों और अन्य मानसिक क्षमताओं पर भी सीधा प्रभाव दिखाई पड़ता है। मध्याह्न भोजन योजना स्कूल में सभी बच्चों की पोषण स्थिति में गुणवत्तापूर्ण सुधार करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। हालाँकि, प्रस्तुत शोध में यह देखा गया कि स्कूल मध्याह्न-भोजन की मात्रा और गुणवत्ता के साथ समझौता कर रहे हैं। मध्याह्न-भोजन की तैयारी और वितरण में स्कूल कोई खास पर्यवेक्षण और निगरानी नहीं कर रहे हैं। वर्तमान अध्ययन में, शोधकर्ता ने विद्यालयों में पोषण की समस्या से निपटने के लिए शिक्षक की तत्परता को विस्तृत किया है। शिक्षकों के साथ साक्षात्कार में यह पाया गया कि लगभग सभी शिक्षक पोषण और संतुलित आहार को लगभग सही ढंग से परिभाषित करने में सक्षम हैं, और उन्हें पोषण के बारे में कुछ बुनियादी जानकारी है जिसे नियमित रूप से अद्यतन करने की आवश्यकता है। शिक्षकों के लिए कुछ ऑनलाइन पाठ्यक्रम विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है, जो उन्हें पोषण पर नवीनतम ज्ञान से परिचित करा सकें।