प्रकाशित 2026-07-14
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सार
आधुनिक भारत में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के शैक्षिक दर्शन की आवश्यकता है, क्योंकि उनका शैक्षिक दर्शन समानता एवं न्याय पर आधारित है। इस शोध-पत्र में उनके शैक्षिक दर्शन को समग्रता से समझने का प्रयास किया गया है। इसमें शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण, उद्देश्य, अध्यापन-अधिगम, स्त्री-पुरुष समान शिक्षा, निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी कैसे होने चाहिए आदि की विस्तृत व्याख्या की गई है। डॉ. अम्बेडकर के शैक्षिक दर्शन का लाभ उठाकर प्रत्येक भारतीय व्यक्ति अपने नैतिक एवं चारित्रिक विकास के साथ-साथ, व्यावहारिक जगत में उसका प्रयोग कर वैज्ञानिक चिंतन की परंपरा का विकास कर सकेगा और भारत विकसित राष्ट्र की संकल्पना के साथ आगे बढ़ सकेगा। बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर का शैक्षिक दर्शन स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, न्याय, स्वाभिमान एवं मानवीय गरिमा जैसे मानवीय एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। यही उनका आधुनिक एवं प्रगतिशील चिंतन है, जो उनके शैक्षिक दर्शन को प्रासंगिक बनाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के शैक्षिक दर्शन के वास्तविक लक्ष्य को प्रस्तुत करती है, जिसका स्पष्ट उल्लेख इस शोध अध्ययन में किया गया है। बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का आधार मानते थे, उनका मानना था कि शिक्षा द्वारा ही शोषित-वंचित समाज को मुख्यधारा में जोड़ा जा सकता है। यदि उनके शैक्षिक दर्शन को व्यावहारिक जगत में लागू किया जाए तो शिक्षक-शिक्षार्थी एवं शोषित-वंचित समाज के साथ-साथ राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का कल्याण निश्चित होगा।