खंड 44 No. 01 (2023): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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विद्यार्थियों की अग्रेंजी व्याकरण की उपलब्धि पर रचनावादी शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता

देवेन्द्र कुमार यादव
शोधार्थी, शिक्षा विद्यापीठ. महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा, महाराष्‍ट्र 442001
शिरीष कुमार पाल
प्रोफेसर, शिक्षा विद्यापीठ. महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा, महाराष्‍ट्र 442001

प्रकाशित 2025-12-04

संकेत शब्द

  • अंग्रेजी व्याकरण,
  • 5‘ई’ मॉडल,
  • सहकारी अधिगम,
  • सहयोगी अधिगम

सार

इस शोधपत्र में माध्यमिक स्तर पर अंग्रेजी व्याकरण सीखने के लिए रचनावादी शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता पर किए गए शोध अध्ययन को प्रस्तुत किया गया है। इस शोध अध्ययन में उद्देश्यपूर्ण न्यादर्शविधि से चयनित उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज द्वारा संचालित माँ शारदा इटंर कॉलेज, जलालाबाद, गाजीपुर के सत्र 2020–21, कक्षा 9 के 140 विद्यार्थियों को न्यादर्श के रूप में चयनित किया गया था। इस शोध अध्ययन में पूर्वपरीक्षण-पश्‍च परीक्षण गैर समतुल्य अर्द्ध-प्रायोगिक अभिकल्प समूह का प्रयोग किया गया है। प्रयोगात्मक समूह के विद्यार्थियों को रचनावादी शिक्षण एवं नियंत्रित समूह के विद्यार्थियों को परंपरागत विधि की सहायता से पढ़ाया गया। प्रयोगात्मक समह में कूल 70 विद्यार्थी एवं नियंत्रित समूह में भी कूल 70 विद्यार्थी सम्मिलित थे। आँकड़ों के संकलन हेतु शोधार्थी द्वारा निर्मित अंग्रेजी व्याकरण उपलब्धि परीक्षण तथा सामाजिक व आर्थिक स्थिति मापनी (ग्रामीण) एवं बुद्धिलब्धि परीक्षण हेतु मानकीकरण उपकरणों का प्रयोग किया गया था। संकलित आँकड़ों का विश्‍लेषण द्विमार्गीय सहप्रसरण विश्‍लेषण सांख्यिकी विधि की सहायता से किया गया था। इस शोध अध्ययन से ज्ञात हुआ कि कक्षा 9 के विद्यार्थियों की अंग्रेजी व्याकरण में पूर्व उपलब्धि को सहचर लेकर विद्यार्थियों की अंग्रेजी व्याकरण में उपलब्धि पर उपचार, सामाजिक व आर्थिक स्थिति, बुद्धिलब्धि एवं इनकी अंतःक्रिया का अंग्रेजी व्याकरण की उपलब्धि पर सार्थक प्रभाव पड़ता है तथा उपचार,जेंडर एवं इनकी अंतःक्रिया का अंग्रेजी व्याकरण की उपलब्धि पर सार्थक प्रभाव नहीं पड़ता है। 5‘ई’ मॉडल, सहकारी अधिगम एवं सहयोगी अधिगम से विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया का गुणात्मक विश्‍लेषण भी प्रस्तुत किया गया है।