Published 2026-07-14
How to Cite
Share
Abstract
यात्रा-वृत्तांत चाहे स्वयं का हो या दूसरों का, यदि हम पढ़ते हुए उसके साथ जुड़ने का प्रयास करते हैं तो हमें भी ऐसी अनुभूति होती है जैसे हम स्वयं ही यात्रा कर रहे हों और उस यात्रा की अनुभूति हमें ज्ञानार्जन के साथ आनंद, मौज-मस्ती एवं रोमांच भी प्रदान करती है। हमारी यह यात्रा या तो किसी आवश्यक कार्य के उद्देश्य से हो सकती है या मनोरंजन के लिए पर्यटन के उद्देश्य से। सभ्यताओं के विकास के पूर्व से आदि मानव ने एक जगह से दूसरी जगह घूमते हुए अपना जीवनयापन किया है। उनके इस आरंभिक व्यवहार से मानव विकास के अनेक आयाम बढ़ते हुए आधुनिक रूप में भी दिखाई पड़ते हैं। अतः यह कह सकते हैं कि साहित्य की यह विधा ‘यात्रा-वृत्तांत’ लेखकों, वृत्तांत रचनाकारों, साहित्यकारों और इतिहासकारों के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, आम पाठकों के लिए भी जीवन-अनुभव को महसूस कराने में महती भूमिका का निर्वहन करती है। अपने पेशेवर विकास कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली द्वारा आयोजित छह मास की अवधि वाली “सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक एवं पाठ्यचर्या सामग्री विकास” 21 दिवसीय कार्यशाला में दिल्ली में चयन किए जाने के उपरांत मुझे सहभागिता करने का अवसर मिला। इस लेख के माध्यम से कार्यशाला के दौरान एक दिवसीय दिल्ली परिभ्रमण के शैक्षिक अनुभवों को, जो समूह के साथ प्राप्त किए गए, साझा करने का प्रयास किया गया है।