Published 2026-07-14
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Abstract
विद्यार्थियों का शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है, क्योंकि यह उनके सर्वांगीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। हमारे देश में प्रत्येक बच्चा अपने विद्यालयी जीवन में शिक्षा लेते हुए वर्ष के अंत में आकलन प्रक्रिया से गुजरता है, जहाँ बच्चों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे परीक्षा में उत्तम परिणाम प्राप्त करेंगे। इस अपेक्षा रूपी दबाव के कारण बच्चे अत्यधिक तनावग्रस्त होने लगते हैं, जिससे उनमें नींद की कमी, कमजोरी, भय की भावना, सिरदर्द, व्यवहार में निराशा, छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आना, आक्रामकता, आत्मविश्वास की कमी, उदासी, अकेलापन एवं चुप रहना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस तनाव और चिंता का मुख्य कारण उन्हें विभिन्न विषयों के लिए तैयारी के साथ-साथ अपने साथियों, माता-पिता और शिक्षकों की उम्मीदों को भी पूरा करना होता है। अतः इस लेख में विद्यार्थियों से जुड़े इन्हीं सरोकारों पर प्रकाश डाला गया है, जिनका समाधान शिक्षक, अभिभावक, परामर्शदाता एवं समुदाय आदि मिलकर कर सकते हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के बारे में उन्हें अधिक जागरूक कर उनमें स्वस्थ जीवन कौशल संबंधित आदतों का निर्माण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त इस आलेख में सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न नीतियों और योजनाओं, जैसे— एकीकृत बाल विकास योजना, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम, परीक्षा पर चर्चा तथा मनोदर्पण आदि के विषय में चर्चा की गई है। क्योंकि ये कार्यक्रम विद्यार्थियों को किसी भी परिस्थिति में चिंता, कठिनाई का सामना निडरता, संयम एवं समझदारी से कर पाने में समर्थ बनाते हैं, जिससे उनका समग्र विकास होगा और वे बेहतर अकादमिक प्रदर्शन करेंगे तथा राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि में बढ़-चढ़कर योगदान कर सकेंगे।