Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
वर्तमान में विद्यालयी शिक्षा को सुधारने के लिए दिए जाने वाले सुझावों में से एक सुझाव है कि विद्यार्थियों को सक्रिय कर्ता मानते हुए उनके मतों, विचारों और विश्वासों को सुना जाए। विद्यार्थियों को विद्यालय के अभ्यासों और प्रक्रियाओं में सम्मिलित करते हुए भागीदार बनाया जाए। इस दिशा में प्रयास करते हुए विद्यालयों द्वारा प्रार्थना सभा, बाल सभा और चेतना सत्र जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, लेकिन प्रायः ये गतिविधियाँ विद्यार्थियों के विचारों को सुनने और उन्हें निर्णय प्रक्रिया का भागीदारी बनाने में प्रतीकात्मक भूमिका निभाती हैं। इस स्थिति में महत्वपूर्ण सवाल है कि इन मंचों को विद्यार्थियों की विचाराभिव्यक्ति, मनन और संवाद के लिए कैसे प्रासंगिक बनाया जा सकता है? मनन-सत्र के माध्यम से कैसे विद्यार्थियों के विचारों, मतों और विश्वासों को संबोधित किया जा सकता है? कैसे विद्यार्थियों को विद्यालय और समुदाय से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विमर्श और निर्णय करना सिखाएँ? इस दिशा में आनंद निकेतन विद्यालय (नागपुर में) द्वारा संचालित मनन-सत्र एक प्रमुख प्रयोग है। इस लेख में किये गए प्रयोग द्वारा यह विश्लेषित किया गया है कि कैसे आनंद निकेतन में संचालित मनन-सत्रों में विद्यार्थियों की विचाराभिव्यक्ति और उनकी भागीदारी द्वारा जीवन कौशलों को संवर्धित किया जा सकता है?