Vol. 48 No. 3 (2024): प्राथमिक शिक्षक
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भारतीय भाषायी प्रवेशिकाएँ — बुनियादी साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान बढ़ाने की एक पहल

रवींद्र कुमार
सह-आचार्य, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (रा.शै.अ.प्र.प.), नई दिल्ली – 110016

Published 2026-07-13

How to Cite

कुमार र. (2026). भारतीय भाषायी प्रवेशिकाएँ — बुनियादी साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान बढ़ाने की एक पहल. प्राथमिक शिक्षक, 48(3), p.79-85. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5497

Abstract

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा 3–18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों के लिए पाठ्यचर्या एवं शिक्षणशास्त्रीय आधार पर 5+3+3+4 की नई शैक्षिक संरचना प्रस्तुत की गई है। इस व्यवस्था में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) स्तर पर बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy) के विकास पर विशेष बल दिया गया है।

विभिन्न शोध अध्ययनों के आधार पर यह माना जाता है कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु से पूर्व ही हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान को विकसित करने के लिए ऐसी शिक्षण-सामग्रियों की आवश्यकता होती है, जिनके माध्यम से बच्चे अपने सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश में उपलब्ध वस्तुओं और अनुभवों से जुड़कर सीख सकें।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत लेख तैयार किया गया है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा Central University of Odisha तथा Central Institute of Indian Languages के सहयोग से सभी भारतीय भाषाओं में प्रवेशिकाओं का विकास किया जा रहा है। साथ ही राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा स्तर पर इनके उपयोग के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।

भारतीय भाषाओं में विकसित इन प्रवेशिकाओं में बच्चों की मातृभाषा की ध्वनियों, वर्णों और मात्राओं के अभ्यास के साथ-साथ 1 से 20 तक की संख्याओं के अभ्यास को भी शामिल किया गया है। इनका निर्माण बच्चों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश को ध्यान में रखकर किया गया है।

इन प्रवेशिकाओं में स्थानीय परिवेश से लिए गए चित्रों और संदर्भों का उपयोग किया गया है, जिसके कारण वे अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही हैं। इनके माध्यम से बच्चे, शिक्षक तथा अन्य वयस्क अपनी मातृभाषा के आधार पर दूसरी भाषा को भी सरलता से सीख पा रहे हैं।

ये प्रवेशिकाएँ न केवल बच्चों की बुनियादी साक्षरता को सुदृढ़ करने में सहायक हैं, बल्कि उनके संख्याज्ञान के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस प्रकार, मातृभाषा-आधारित अधिगम को बढ़ावा देते हुए ये सामग्री राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति में सार्थक योगदान प्रदान कर रही हैं।