Vol. 49 No. 4 (2025): प्राथमिक शिक्षक
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कक्षा में आनंद — सीखने का जीवंत अनुभव

पद्मा यादव
आचार्या, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली – 110016

Published 2026-07-13

How to Cite

यादव प. (2026). कक्षा में आनंद — सीखने का जीवंत अनुभव. प्राथमिक शिक्षक, 49(4), p.97-105. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5335

Abstract

कक्षा केवल ज्ञान प्रदान करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास और सक्रिय अधिगम का केंद्र होती है।

लेख में बताया गया है कि कक्षा में आनंद तब उत्पन्न होता है जब वहाँ सुरक्षा, स्वच्छता, पर्याप्त रोशनी और बाल-अनुकूल फर्नीचर उपलब्ध हो। कक्षा का वातावरण आकर्षक, प्रेरक और बच्चों की रुचियों के अनुसार सजाया जाता है, जिसमें उनके स्वयं के कार्य, चित्र, चार्ट और थीम आधारित सामग्री शामिल होती है।

शिक्षक की पेडागॉजी बाल-केंद्रित, अनुभवात्मक, समावेशी और संवेदनशील होती है। वे सरल, स्नेहपूर्ण और बहुभाषी-अनुकूल भाषा का प्रयोग करते हैं, जिससे बच्चे बिना डर और बाधा के सीखने में सक्रिय रहते हैं।

मूल्यांकन सहयोगात्मक, सतत और सकारात्मक होता है, जिसमें बच्चों की गलतियों को सीखने का अवसर माना जाता है। शिक्षक बच्चों को आत्म-मूल्यांकन और सहपाठी मूल्यांकन के अवसर भी देते हैं।

इसके साथ ही, माता-पिता और समाज की सहभागिता आवश्यक है। घर और विद्यालय का संबंध, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और सामुदायिक परियोजनाएँ सीखने को वास्तविक जीवन से जोड़ती हैं।

इस प्रकार, आनंददायी शिक्षा बच्चों को सक्रिय, आत्मविश्वासी और सीखने के लिए उत्साहित बनाती है।