Vol. 47 No. 4 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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बुनियादी स्तर के बच्चों के लिए विकसित ‘जादुई-पिटारा’ : एक पहल

पद्मा यादव
प्रोफेसर, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (रा.शै.अ.प्र.प.), नई दिल्ली – 110016।

Published 2026-07-13

How to Cite

यादव प. (2026). बुनियादी स्तर के बच्चों के लिए विकसित ‘जादुई-पिटारा’ : एक पहल. प्राथमिक शिक्षक, 47(4), p.55-65. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5428

Abstract

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा बुनियादी स्तर की राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा को ध्यान में रखकर 3–8 वर्ष के बच्चों के लिए ‘जादुई पिटारा’ तैयार किया गया है। ‘जादुई पिटारा’ शुरुआती वर्षों में बच्चों को भाषा और संख्याज्ञान के साथ-साथ जीवनपर्यंत सीखने के लिए तत्पर बनाने में सहायता करता है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) 2020 के सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक— शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने— में योगदान देता है।

‘जादुई पिटारा’ में खेल-आधारित अधिगम सामग्री शामिल है, जो बाल विकास के पाँच प्रमुख आयामों को सुदृढ़ करने में सहायक है— शारीरिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषायी विकास, सृजनात्मक विकास तथा सामाजिक एवं भावनात्मक विकास।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि इस पिटारे में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विविध खेल-सामग्री उपलब्ध है। ‘जादुई पिटारा’ की खेल-सामग्री का प्रयोग शिक्षक कक्षा में तथा अभिभावक घर पर बच्चों के साथ किस प्रकार कर सकते हैं, यह जानना अत्यंत आवश्यक है, ताकि इसका उपयोग सही दिशा में हो सके।

शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों तथा शिक्षा-प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों के लिए भी यह जानकारी उपयोगी है, क्योंकि यह उनकी जिम्मेदारी है कि देश के सभी विद्यालयों तक यह अधिगम-सामग्री पहुँचे और बच्चों को इसका लाभ प्राप्त हो सके।

इस लेख में विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई है, जैसे— ‘जादुई पिटारा’ क्यों आवश्यक है? ‘जादुई पिटारा’ में क्या है? इसका उपयोग कैसे किया जाए? तथा इसके प्रभावी प्रयोग में शिक्षकों की क्या भूमिका है?