भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और संवैधानिक मूल्य : एक अध्ययन
Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा को एक मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है। इसके बावजूद समान शिक्षा, संदर्भयुक्त पाठ्यक्रम और पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों का समग्र विकास बाधित हो रहा है। इन समस्याओं का एक प्रमुख कारण समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं तथा हाशिए पर स्थित वर्गों के अधिकारों को पर्याप्त रूप से संबोधित न किया जाना भी हो सकता है।
हालाँकि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के साथ एक समग्र और बहुविषयक शिक्षा प्रणाली के निर्माण का प्रयास किया गया है, जो संविधान में निहित मौलिक मूल्यों को बढ़ावा देती है। इस शोध का उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों को शिक्षा प्रणाली से जोड़ते हुए यह समझना है कि इन्हें कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों में किस प्रकार अंतर्निहित किया जा सकता है।
संविधान का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। विद्यालय इन मूल्यों की नींव रखते हैं और उच्च शिक्षा इन्हें और अधिक सुदृढ़ करती है। इसके अलावा, संविधान के भाग III तथा राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के तहत समानता और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित किया गया है।
नीति विशेष रूप से हाशिए पर स्थित वर्गों के लिए समान अवसर प्रदान करती है और वर्ग-आधारित असमानताओं को समाप्त करने का प्रयास करती है। विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता, सतत जीवनशैली और सामुदायिक भागीदारी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 संवैधानिक मूल्यों को शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।