Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
बच्चों को समझते हुए विभिन्न कहानियों एवं नाटकों द्वारा अपेक्षित भाषा विकास किया जाता है। परिवारों में शामिल बड़े बुज़ुर्ग, जैसे— माता-पिता, दादा-दादी एवं नाना-नानी आदि के द्वारा बच्चे कहानियाँ सुनते हैं। वे उनसे संवाद स्थापित करते हैं और कई तरह की सुनी हुई आवाज़ें निकालकर अपने बड़े बुज़ुर्गों को संतुष्ट करते हैं।
कई बार वे शब्दों का चयन कर लेते हैं, परंतु उन्हें बोल नहीं पाते। इन सभी स्थितियों में बड़े बुज़ुर्ग उनकी मदद करते हैं।
उक्त आलेख लोककथाओं पर आधारित है, जिसमें बच्चों के भाषा विकास में इसकी महती भूमिका के साथ ही कक्षा-कक्ष में शिक्षकों द्वारा दिए गए पर्याप्त अवसरों का भी उल्लेख है।
यह आलेख पाठकों का लोककथाओं के साथ नवीन प्रयोगों की ओर भी ध्यान केंद्रित करता है।