Vol. 49 No. 2 (2026): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा — बुनियादी स्तर 2022 के आकलन के संदर्भ में शिक्षणशास्त्रीय विश्लेषण

अनुभूति यादव
पीएच.डी. शोधार्थी (शिक्षाशास्त्र), शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007।
राज गुप्ता
पीएच.डी. शोधार्थी (शिक्षाशास्त्र), शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007।
सुमित गंगवार
सहायक आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007।

Published 2026-07-13

How to Cite

यादव अ., गुप्ता र., & गंगवार स. (2026). राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा — बुनियादी स्तर 2022 के आकलन के संदर्भ में शिक्षणशास्त्रीय विश्लेषण. प्राथमिक शिक्षक, 49(2), p.129-142. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5371

Abstract

इस शोध पत्र में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा— बुनियादी स्तर (एन.सी.एफ.-एफ.एस.) 2022 द्वारा सुझाई गई आकलन की विभिन्न प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई है। इसके लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा— बुनियादी स्तर 2022 के शिक्षणशास्त्र (आकलन) प्रसंग के अंतर्गत विषयवस्तु विश्लेषण किया गया है।

विषयवस्तु विश्लेषण के उपरांत शोधार्थियों ने पाया कि आकलन प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा का एक अभिन्न अंग और महत्वपूर्ण घटक है। यह विद्यार्थियों की प्रगति और उनकी क्षमताओं को मापने का मात्र एक उपकरण नहीं है, बल्कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाने का माध्यम भी है।

पारंपरिक रूप से विद्यार्थियों का आकलन उनकी शैक्षिक उपलब्धियों के मूल्यांकन हेतु किया जाता रहा है, परंतु आकलन का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थी की शैक्षिक दक्षताओं तथा क्षमताओं का विकास करना होना चाहिए।

आकलन द्वारा एक विशिष्ट अधिगम पारिस्थितिकी का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी की समग्र दक्षता का विकास हो सके। आकलन के पूर्व निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार विभिन्न पद्धतियों का उचित चयन करना अति आवश्यक होता है, जिससे आकलन की प्रक्रिया अधिक सुसंगत तथा पारदर्शी बन सके।

इस शोध लेख के अध्ययन उपरांत बुनियादी स्तर पर कार्यरत अध्यापक तथा इस स्तर पर अध्यापन हेतु तैयार होने वाले अध्यापक आकलन के मार्गदर्शक सिद्धांतों, आकलन के विभिन्न तरीकों तथा साधनों, विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण के तरीकों तथा विद्यार्थियों के अधिगम आकलन की प्रगति का दस्तावेजीकरण करने में सक्षम हो सकेंगे।