खंड 49 No. 3 (2026): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत शिक्षक-प्रशिक्षण एवं इसका एफ.एल.एन. प्रक्रियाओं पर प्रभाव : एक लैंगिक दृष्टिकोण

अतुल बमराड़ा
सहायक अध्यापक, विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार, उत्तराखंड – 248001
जगमोहन सिंह कठैत
प्रवक्ता, सेवारत शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड – 246001
रेनू
प्रवक्ता, सेवारत शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड – 246001

प्रकाशित 2026-07-13

सार

यह अध्ययन प्रारंभिक साक्षरता एवं संख्याज्ञान कौशल (एफ.एल.एन.) कक्षाओं को पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षिक विधियों पर शिक्षक-प्रशिक्षण के प्रभाव का विश्लेषण करता है, जिसमें जेंडर आधार पर विशेष ध्यान दिया गया है।

शिक्षण विधियों, कक्षा प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) एकीकरण में हुए परिवर्तनों का आकलन 5-बिंदु लिकर्ट स्केल के माध्यम से किया गया। कुल 1,310 प्रशिक्षित शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं का वर्णनात्मक सांख्यिकी और क्रॉस-टैब के उपयोग द्वारा विश्लेषण किया गया, जिसमें जेंडर को एक प्रमुख चर के रूप में शामिल किया गया।

निष्कर्षों से पता चला कि शिक्षक-प्रशिक्षण ने पुरुष और महिला दोनों शिक्षकों के शिक्षण कौशल, कक्षा प्रबंधन और तकनीकी उपयोग में सकारात्मक सुधार किया। पुरुष शिक्षकों ने तकनीकी उपकरणों के प्रयोग में अधिक आत्मविश्वास दिखाया, जबकि महिला शिक्षकों ने कक्षा प्रबंधन और विद्यार्थियों की सहभागिता में बेहतर परिणाम अनुभव किए।

जेंडर आधारित अंतर सांख्यिकीय रूप से कुछ हद तक महत्वपूर्ण पाए गए, लेकिन व्यावहारिक दृष्टि से बहुत ही सूक्ष्म और नगण्य रहे।

समग्र रूप से, प्रशिक्षण कार्यक्रम सभी शिक्षकों के लिए समान रूप से प्रभावी साबित हुए और व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित किया। ये निष्कर्ष शिक्षक-प्रशिक्षण डिजाइन में जेंडर आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

यह अध्ययन एफ.एल.एन. मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।