Vol. 49 No. 1 (2025): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा का क्रियान्वयन : विद्यालयी शिक्षा और शिक्षक-शिक्षा पर प्रभाव

शुभिका शाह
शोधार्थी, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली – 110078
अंजली शौकीन
सहायक प्राचार्य, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली – 110078

Published 2026-07-13

How to Cite

शाह श., & शौकीन अ. (2026). राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा का क्रियान्वयन : विद्यालयी शिक्षा और शिक्षक-शिक्षा पर प्रभाव. प्राथमिक शिक्षक, 49(1), p.62-71. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5293

Abstract

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा – बुनियादी स्तर 2022 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा – विद्यालयी शिक्षा 2023 के माध्यम से भारत सरकार ने विद्यालयी शिक्षा और शिक्षक-शिक्षा में सुधार हेतु व्यापक प्रयास किए हैं। यह शोध इन नीतिगत पहलों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन तथा उनके शैक्षिक प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सरकारी रिपोर्टों, राज्य-स्तरीय नीतियों तथा कार्यान्वयन दिशा-निर्देशों के दस्तावेजीय विश्लेषण के माध्यम से अध्ययन में डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म (जैसे— दीक्षा और स्वयं), शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम (जैसे— निष्ठा), पाठ्यक्रम पुनर्गठन तथा डिजिटल विभाजन को कम करने के प्रयासों जैसे प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि शहरी विद्यालयों ने मिश्रित शिक्षण मॉडल और आई.सी.टी. आधारित शिक्षण को अपेक्षाकृत सफलतापूर्वक अपनाया है, जबकि ग्रामीण विद्यालयों को आधारभूत संरचना, डिजिटल पहुँच तथा शिक्षक-तैयारी से संबंधित अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक-शिक्षा सुधारों ने व्यावसायिक विकास के अवसरों में वृद्धि की है, किंतु संसाधनों के असमान वितरण के कारण शैक्षिक असमानताएँ अब भी विद्यमान हैं। यह विश्लेषण कार्यान्वयन प्रक्रिया की उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों को रेखांकित करता है। साथ ही, यह सरकारी पहलों की प्रभावशीलता के संबंध में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हुए राष्ट्रव्यापी समान शैक्षिक परिणाम सुनिश्चित करने हेतु लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता को सामने लाता है। शोध-पत्र में विशेष रूप से बुनियादी स्तर की शिक्षा, पाठ्यक्रम एवं शिक्षाशास्त्र, शिक्षक-शिक्षा, प्रौद्योगिकी एकीकरण तथा समावेशिता एवं समता जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।