खंड 45 No. 3 (2026): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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नैनो-लर्निंग पर विद्यार्थी-शिक्षकों की अवधारणा एक विश्लेषण

सौरभ कुमार द्विवेदी
शोधार्थी, शिक्षा विभाग (केंद्रीय शिक्षा संस्थान), दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली 110007
पिन्कल चौधरी
सहायक आचार्य, शिक्षा विभाग (केंद्रीय शिक्षा संस्थान), दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली 110007

प्रकाशित 2026-07-14

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सार

इस शोध अध्ययन का उद्देश्य ‘नैनो-लर्निंग’ के उपयोग एवं उसके प्रभाव पर विद्यार्थी-शिक्षकों की धारणाओं का पता लगाना है। ‘नैनो-लर्निंग’, छोटे, संक्षिप्‍त तथा लक्षित शिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से ज्ञान प्रदान करता है। यह शिक्षा के क्षेत्र में एक उभरती हुई युक्‍ति है। इस शोध अध्ययन को वास्तविक शैक्षिक वातावरण में संचालित किया गया ताकि विद्यार्थी-शिक्षकों की वास्तविक धारणाओं तथा अनुभवों को समझा जा सके। विद्यार्थी-शिक्षकों की धारणाएँ उनके व्यक्‍तिगत अनुभवों, शैक्षिक पृष्‍ठभूमि तथा तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती हैं। इसी पर शोधार्थी द्वारा किए गए शोध अध्ययन के परिणामों को इस शोध पत्र में प्रस्तुत किया गया है। इस शोध अध्ययन में यह पाया गया कि विद्यार्थी-शिक्षकों की धारणाएँ उनके सामाजिक तथा सांस्कृतिक संदर्भों से प्रभावित होती हैं तथा उनके शिक्षण एवं सीखने की शैली, शैक्षिक नीतियों एवं तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी इनकी धारणाओं पर प्रभाव पड़ता है। नैनो-लर्निंग को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शैक्षिक संस्थानों को उपयुक्‍त प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान करने की आवश्यकता है। शिक्षकों को नैनो-लर्निंग के साथ पारंपरिक शिक्षण विधियों का संतुलित उपयोग करना चाहिए ताकि गहन तथा व्यापक ज्ञान का निर्माण हो सके। इस शोध पत्र में नैनो-लर्निंग के विषय में विभिन्न सकारात्मक व नकारात्मक पक्ष प्रस्तुत किए गए हैं, व्यापक रूप से कहें, तो नैनो-लर्निंग हमारी लर्निंग का छोटा भाग है, जो ऑनलाइन या पारंपरिक दोनों तरह से हो सकती है। नैनो-लर्निंग का सीमित उपयोग अधिक लाभकारी हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए नैनो-लर्निंग का प्रयोग ज़िम्मेदारी व सावधानीपूर्वक करके उनकी शिक्षा को प्रभावशाली व रुचिकर बनाया जा सकता है।