खंड 45 No. 3 (2026): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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‘पाती अपनों को मुहिम’ एक नवाचारी प्रयास

सरजू सिंह नेगी
संयोजक, पाती अपनों को, (राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी) विशिष्ट सहायक सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री, राजस्थान सरकार, राजस्थान, 170/69, सेक्टर 17, हल्दीघाटी मार्ग, सांगानेर, जयपुर, राजस्थान 302033
मीना सिरोला
आचार्य, (सह-संयोजिका, पाती अपनों को) शिक्षा संकाय, वनस्थली विद्यापीठ, निवाई, राजस्थान 304022

प्रकाशित 2026-07-14

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सार

आज समाज विभिन्न क्षेत्रों में उत्तरोत्तर उन्नति कर रहा है। लोगों के जीवन स्तर, शिक्षा, तथा स्वास्थ्य में निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन इन सबके बावजूद आज संवेदनशून्यता, संवादहीनता, रिश्तों में आ रही छीजन, युवा पीढ़ी का दिग्भ्रमित होना, सोशल मीडिया की गिरफ्त में रहते अपनों के लिए समय न निकाल पाना, यह सब एक सुखी परिवार, समाज व राष्ट्र के भविष्य के लिए चिंतन का विषय हैं। अपनों को कैसे करीब लाया जाए? सामाजिक सरोकार एवं जीवन मूल्यों के प्रति कैसे रुझान पैदा किया जाए? युवा पीढ़ी को रचनात्मकता की ओर कैसे मोड़ा जाए? संवादहीनता को कैसे कम किया जाए? इन्हीं सब बातों को समाहित करते हुए वर्ष 2018 से लुप्त होती पत्र लेखन विधा को केंद्र में रखते हुए ‘पाती अपनों को मुहिम’ नाम से नवाचारी प्रयोग आरंभ किया गया। राजस्थान राज्य के टोंक जिले के पीपलू उपखंड में 5 सितंबर 2018 को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक द्वारा शिष्य को पत्र लिखकर जीवन मूल्यों की सीख देने के उद्देश्य से शुरू की गई मुहिम के अंतर्गत अब तक 21 विषयों पर पत्र लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा चुका है, इन्हीं लेखन प्रतियोगिता में अभी तक तीन लाख से भी अधिक पत्र लिखे जा चुके हैं। इसके आधार पर पत्र आधारित पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। इस लेख में उक्त नवाचार से पर पत्र लेखन विधा द्वारा बच्चों को वैयक्तिक और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के प्रयोग का वर्णन किया गया है। ‘पाती अपनों को मुहिम’ बच्चों में संवेदनशीलता पैदा करने में कारगर साबित हो रही है, अपितु युवा पीढ़ी, विशेष विद्यालयी विद्यार्थियों के सीखने की प्रवृत्ति, सृजनशीलता और लेखन कौशल को भी बढ़ाने में कारगर साबित हो रही है। इस लेख में इसी विषय पर विस्तृत चर्चा की गई है।