खंड 44 No. 2 (2023): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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बुनियादी साक्षरता संबंधी सीखने के प्रतिफल—‘उल्लास’ प्रवेशिका का समीक्षात्मक अध्ययन

उषा शर्मा
आचार्य एवं प्रभारी, राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र प्रकोष्ठ, रा.शै.अ.प्र.प., नई दिल्ली

प्रकाशित 2026-07-14

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सार

ष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रौढ़ शिक्षा और जीवनपर्यंत सीखने के संदर्भ में 2030 तक पूर्ण साक्षर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की अनुशंसा करती है। इसके साथ ही यह स्पष्ट रूप से उल्लेख करती है कि बुनियादी साक्षरता प्राप्त करना, शिक्षा प्राप्त करना और जीविकोपार्जन का अवसर प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। प्रौढ़ शिक्षा का नाम अब ‘सभी के लिए शिक्षा’ है। पूर्ण साक्षर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सबसे अहम नींव है— बुनियादी साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान। इस हेतु शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ चलाया जा रहा है, जिसे ‘उल्लास’ (ULLAS – Understanding of Lifelong Learning for All) भी कहते हैं। इस हेतु 2021 में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली में राष्ट्रीय साक्षरता केंद्र प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। इस प्रकोष्ठ द्वारा सीखने के प्रतिफलों का निर्माण किया गया और उसी को आधार बनाकर ‘उल्लास’ प्रवेशिकाओं का निर्माण किया गया। यह शोध पत्र इन्हीं प्रवेशिकाओं का एक समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है, जिसमें यह पड़ताल करने का प्रयास किया गया है कि प्रवेशिकाएँ बुनियादी साक्षरता संबंधी सीखने के प्रतिफलों की उपलब्धि में किस रूप में सहायक हैं। ये प्रवेशिकाएँ बुनियादी साक्षरता संबंधी सीखने के प्रतिफलों की उपलब्धि में किस प्रकार के अवसर प्रदान करती हैं? क्या प्रवेशिकाएँ पढ़ना-लिखना सीखने में शिक्षार्थी के विभिन्न परिप्रेक्ष्यों को संबोधित करती हैं? क्या प्रवेशिकाएँ भाषा के विशेष संदर्भ में बहुभाषिकता के विभिन्न मुद्दों को संबोधित करती हैं? शिक्षार्थी द्वारा हिंदी भाषा सीखने में उनकी मातृभाषा के प्रयोग संबंधी प्रावधान किस प्रकार के हैं? हिंदी भाषा और गणित का किस प्रकार से एकीकृत रूप संयोजित किया गया है? यह शोध पत्र इन्हीं शोध प्रश्नों के संभावित उत्तरों को प्रस्तुत करता है, जिससे इन प्रवेशिकाओं की सार्थकता प्रासंगिक प्रतीत होती है।