प्रकाशित 2026-07-14
##submission.howToCite##
##plugins.generic.shariff.share##
सार
इक्कीसवीं सदी को डिजिटल क्रांति का युग माना जा रहा है, जिसमें सोशल मीडिया को मानव इतिहास की नवीनतम घटना के रूप में देखा जा रहा है। इसके अंतर्गत फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, लिंक्डइन, यूट्यूब, टेलीग्राम आदि जैसे प्लेटफॉर्म आते हैं। कोविड-19 महामारी के बाद उक्त सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। कोविड-19 महामारी की अवधि से अब तक सोशल मीडिया ने विद्यार्थियों को शिक्षा में ऑनलाइन कक्षा, होमवर्क, सेमिनार, वर्कशॉप, ऑनलाइन परीक्षा, अच्छे शिक्षकों एवं दोस्तों से शिक्षण से संबंधित मदद लेने, सूचना प्राप्ति, अच्छी कोचिंग से सीखने तथा स्वयं के विचारों को दूसरों के साथ साझा करने आदि में सहायता की। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से किशोरों में चिंता, तनाव, अवसाद, अकेलापन, आत्महत्या, आत्मसम्मान में कमी, ध्यान में कमी, साइबर-बुलिंग, हैकिंग और फिशिंग, मनोदैहिक लक्षण, रिश्तों की समस्याएँ आदि जैसे मनोरोग हो रहे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (रा.शै.अ.प्र.प., 2022) द्वारा किए गए “मेंटल हेल्थ एंड वेल-बीइंग ऑफ स्कूल स्टूडेंट्स—ए सर्वे” के अनुसार देश के 45 प्रतिशत बच्चे अपनी शारीरिक संरचना से खुश नहीं हैं। वर्तमान में हमारे किशोर सोशल मीडिया के कारण विभिन्न मानसिक रोगों का शिकार हो रहे हैं। अतः आवश्यकता है कि सरकार सोशल मीडिया के उपयोग पर जागरूकता अभियान चलाकर किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करे तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए कड़े कानूनों का निर्माण करे। इन्हीं सरोकारों को शामिल करता हुआ यह लेख सोशल मीडिया के कारण होने वाले मानसिक रोगों की पहचान तथा उनके निवारण के उपायों के सुझाव प्रस्तुत करता है।