खंड 44 No. 2 (2023): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान हेतु बुनियादी ढाँचे एवं सामर्थ्य की आवश्यकता

केवलानंद कांडपाल
*प्रधानाचार्य, राजकीय इटंरमीडियट कालेज, मडलसेरा, जनपद-बागेश्वर, उत्तराखड 263642

प्रकाशित 2026-07-14

संकेत शब्द

  • बाल वाटिका,
  • आँगनबाड़ी केंद्रों,
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020,
  • निपुण (NIPUN)

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सार

विद्यालयों में पढ़ने-लिखने और संख्या की समझ पर लगातार काम करने के बावजूद बहुत बच्चे कक्षा -स्तर के अनरूप अपेक्षित दक्षताओ (बहुत बार अपनी वर्तमान कक्षाओ से पूर्व की कक्षा-स्तर के अनुरूप दक्षताओ को भी) को प्राप्‍त करने में असफल हैं। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्वीकार किया गया है कि वर्तमान समय में भारत में ‘अधिगम का संकट’ है। इस नीति की पाठ्यचर्या एवं शिक्षणशास्‍त्र की नई व्यवस्था 5+3+3+4 के तहत तीन-आठ वर्ष की उम्र को फाउंडेशनल स्टेज कहा गया है। फाउंडेशनल स्टेज की अवधि जीवनभर सीखने और विकास की बुनियाद रखती है और यह वयस्क जीवन की गुणवत्ता का एक प्रमुख निर्धारक है। बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान के लक्ष्यों को प्राप्‍त करने के लिए 5 जुलाई 2021 को एक राष्‍ट्रीय मिशन ‘समझ के साथ पढ़ने और संख्या ज्ञान में प्रवीणता के लिए राष्‍ट्रीय पहल’ शुरू किया गया था। इसे संक्षेप में ‘निपुण (NIPUN) भारत मिशन’ कहा गया है। वर्तमान में आँगनबाड़ी केंद्र के कार्य दायित्वों में तीन से छह वर्ष के लिए पूर्व प्राथमिक एवं अनौपचारिक शिक्षा प्रदान करना शामिल है। उत्तराखंड राज्य ने 12 जुलाई 2022 से ‘बाल वाटिका’ (पूर्व -प्राथमिक कक्षा) की शरुआत करके राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने वाला पहला राज्य होने का दावा किया है। प्राथमिक विद्यालय परिसर में संचालित आँगनबाड़ी केंद्रों को ‘बाल वाटिका’ की भमिूका में देखा जा रहा है। इसलिए यह समीचीन जान पड़ता है कि वर्तमान में संचालित आँगनबाड़ी केंद्रों की वस्तुस्थिति , इनकी पाठ्यचर्या का गहन अवलोकन, इन केंद्रों में नामांकित तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चों की भाषा एवं गणितीय दक्षता स्तर का आकलन करके यह जानने-समझने की कोशिश की जाए कि वर्ष 2026–27 तक  बुनियादी साक्षरता  एवं संख्या ज्ञान के लक्ष्यों को प्राप्‍त करने के लिए ‘निपुण भारत मिशन’ में अपना योगदान देने के लिए किस तरह से तैयार हैं? उनकी  चुनौतियाँ एवं ज़रूरतें क्या हैं? इसी उद्शदे्य से यह शोध अध्ययन कर शोध से प्राप्‍त अनभु व एवं अतर्ं दृष्‍ट‍ि को इस शोध-पत्र में प्रस्तुत किया गया है।