Vol. 32 No. 04 (2012): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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शब्द संवेदना और समाज

Published 2024-11-29

Keywords

  • समाज और संवाद,
  • शब्द संवेदना

How to Cite

प्रमोद कुमार तिवारी. (2024). शब्द संवेदना और समाज. भारतीय आधुनिक शिक्षा, 32(04), p. 69-74. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/bas/article/view/956

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Abstract

यह लेख "शब्द संवेदना और समाज" के बीच संबंधों की विश्लेषणात्मक चर्चा करता है। शब्द संवेदना का अर्थ है शब्दों के माध्यम से उत्पन्न होने वाली भावनाएँ, विचार, और संवेदनाएँ, जो समाज में संवाद और समझ बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। समाज में शब्दों का प्रयोग केवल संचार का साधन नहीं होता, बल्कि यह हमारे विचारों, दृष्टिकोणों और सामाजिक मूल्यांकन को भी व्यक्त करता है। लेख में यह बताया गया है कि शब्द संवेदना न केवल व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करने का एक तरीका है, बल्कि यह समाज के सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक ढाँचे को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।

लेख में यह भी बताया गया है कि शब्द संवेदना समाज में बदलाव और जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब शब्दों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है, तो यह समाज में एक नया दृष्टिकोण, समानता और सहिष्णुता की भावना उत्पन्न करती है। लेख में यह विश्लेषण किया गया है कि समाज में शब्दों के सही और सकारात्मक उपयोग से कैसे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सामंजस्य, समझ और सहयोग की भावना बढ़ाई जा सकती है।