प्राचीन भारतीय ज्ञान विरासत द्वारा भारत का समग्र विकास : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक व्यापक लक्ष्य
Published 2026-07-14
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Abstract
प्राचीन भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ का एक आधार है। आध्यात्मिक ज्ञान, प्रज्ञा और सत्य की खोज को लंबे समय से भारतीय दर्शन में सर्वोच्च माना गया है। प्राचीन भारत में, शिक्षा केवल वर्तमान दुनिया में या विद्यालयी शिक्षा से परे जीवन जीने के लिए ज्ञान प्राप्त करने हेतु नहीं थी, बल्कि इसका अंतिम उद्देश्य पूर्ण आत्म-साक्षात्कार एवं स्व-साक्षात्कार था।
नालंदा और तक्षशिला जैसे प्रमुख शैक्षिक संस्थान व्यापक, बहुविषयक शिक्षा प्रदान करते थे और दुनिया भर के शिक्षा जगत को आकर्षित करते थे, जो भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत के उदाहरण हैं। ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ इसी परंपरा को जारी रखने पर बल देती है कि लोगों के लिए नैतिक, सामाजिक, शारीरिक, भावनात्मक और बौद्धिक सभी स्तरों पर विकास करना शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ज्ञान और सत्य की उच्चतम मानवीय आकांक्षाओं पर बल देने के साथ, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ का उद्देश्य स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों तथा पारंपरिक ज्ञान को समकालीन शैक्षिक ढाँचे में सम्मिलित करना है। इन घटकों के महत्व को पहचानते हुए, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी और व्यापक शैक्षिक ढाँचा प्रदान करने पर बल देती है, जो विद्यार्थियों को इक्कीसवीं सदी की समस्याओं के समाधान के लिए तैयार करती है। साथ ही, उन्हें अपनी जड़ों से भी जोड़ने पर केंद्रित है।
आधुनिक शैक्षिक प्रणालियाँ पिछली शताब्दियों की सबसे प्रभावी तकनीकों को सम्मिलित कर सकती हैं। इस नीति का उद्देश्य एक गतिशील और समावेशी शिक्षण वातावरण स्थापित करना है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा के कुछ अभ्यासों एवं विषयवस्तु को शैक्षिक प्रणाली में चिंतन करके रचनात्मकता, समीक्षात्मक चिंतन तथा सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देती है। यह नीति कहती है कि विद्यार्थियों के नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास में सुधार के लिए प्राचीन भारतीय शास्त्रों, दर्श