Vol. 44 No. 2 (2023): भारतीय आधुनिक शिक्षा
Articles

बाल मन पर अनुभव आधारित अधिगम का प्रभाव एक साहित्यिक प्रसंग

अमरीन अली
कनिष्‍ठ परियोजना सहायक, अध्यापक शिक्षा विभाग, राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनसुंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली 110006

Published 2026-07-14

Keywords

  • बच्चों के बहुमुखी विकास,
  • बच्चों के मनोविज्ञान,
  • राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा

How to Cite

अली अ. (2026). बाल मन पर अनुभव आधारित अधिगम का प्रभाव एक साहित्यिक प्रसंग. भारतीय आधुनिक शिक्षा, 44(2), p.24-32. https://doi.org/10.64742/j1gc6d45

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Abstract

हम सदैव बच्चों के बहुमुखी विकास के लिए अनेक प्रयास करते हैं। क्योंकि बच्चा सर्वप्रथम अपने आस-पास के परिवेश से ही सीखना आरंभ करता है। जिसकी शुरुआत अपने परिवार या घर से होती है, क्योंकि उसका शुरुआती समय परिवार के साथ ही व्यतीत होता है। “3 वर्ष की आयु तक, घर का वातावरण ही बच्चे के लिए, पर्याप्‍त पोषण, अच्छी स्वास्थ्य की आदतें, जि़म्मेदारी पूर्वक  देखभाल, सुरक्षा और संरक्षण तथा बचपन के आरंभ‍िक दिनों में सीखने के लिए प्रोत्साहन का एकमात्र प्रदाता होता है। (बुनीयादी स्तर की राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2022, पृष्ट 15)।” जब वह धीरे-धीरे बड़ा होता है, तो उसके संपर्क में अन्य लोग आते हैं। इसी कड़ी में वह विद्यालय जाकर औपचारिक रूप से सीखना प्रारंभ करता है। इस सीखने की प्रक्रिया में वह अधिगम-शिक्षण के दौरान अपने परिवार द्वारा एवं अपने निकटतम परिवेश में सीखा हुआ पूर्व ज्ञान सीखने की बुनीयाद रखता है। इस लेख में इन्हीं सरोकारों को शामिल करते हुए माता-पिता एवं अभिभावकों की सोच तथा व्यवहार का बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रभाव को हिंदी साहित्य की कहानियों, उपन्यासों आदि के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, बताया गया है कि साहित्य बच्चों के मनोविज्ञान को समझने एवं उनकी समस्याओ के समाधान ढूँढ़ने का सार्थक आधार है