Published 2026-07-14
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Abstract
धरती की आंतरिक हलचल और अन्य कारणों से अति-वर्षा, भूस्खलन, बाढ़, भूकंप आदि प्राकृतिक घटनाएँ घटित होती रहती हैं। प्रकृति में मानव के अत्यधिक हस्तक्षेप आपदा की संभावनाओं में वृद्धि करते हैं। मानवजनित जटिलताएँ भी बहुत बार जोखिम को बढ़ा देती हैं। इसके साथ ही, हमारे ज्ञान, कौशल एवं संवेदनशीलता के अभाव में आपदा जनित नुकसान बढ़ जाता है। हमें निरंतर संभावित आपदाओं के साए में जीवनयापन करना पड़ता है। इससे निरंतर भयभीत रहने के बजाय क्षमता विकास एवं समुचित तैयारी करना श्रेयस्कर है। कहा जाता है कि प्राकृतिक घटनाएँ प्रायः हानिकारक नहीं होती हैं, यह मनुष्य की लापरवाही, अज्ञानता और तैयारी का अभाव है, जो जोखिम को बढ़ा देता है। विद्यालय की अहम भूमिका विद्यार्थियों में समाज के लिए उपयोगी, ज़िम्मेदार एवं संवेदनशील मूल्यों का बीजारोपण करना है। इसमें आपदाओं के प्रति सजगता, संवेदनशीलता एवं सम्यक तैयारी भी शामिल है। इस लेख में आपदा प्रबंधन को लेकर नीतिगत दृष्टिकोण, आपदा प्रबंधन का आशय एवं उसके घटक विद्यालय एवं विद्यार्थी आपदा प्रबंधन में किस तरह से अपनी भूमिका निर्वहन कर सकते हैं? आदि को व्यावहारिक दृष्टि से जानने व समझाने का प्रयास किया गया है।