प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के बुनियादी भाषा ज्ञान एवं संख्या ज्ञान पर ‘निपुण भारत’ मिशन के प्रभाव का अध्ययन
Published 2026-07-14
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Abstract
‘निपुण भारत’ मिशन का उद्देश्य एक ऐसे शैक्षणिक परिवेश का सृजन करना है, जिससे कक्षा 3 तक बच्चे पठन, वाचन एवं लेखन के साथ संख्या ज्ञान की अपेक्षित योग्यता अर्जित कर सकें। बरेली जनपद के 5 प्राथमिक विद्यालयों से सामान्य यादृच्छिक विधि का प्रयोग करके 100 विद्यार्थियों का चयन किया गया, जिनमें 62 छात्र तथा 38 छात्राएँ सम्मिलित थीं। बुनियादी हिंदी एवं अंग्रेज़ी भाषा योग्यता तथा बुनियादी संख्या ज्ञान के अध्ययन हेतु स्वनिर्मित प्रश्नावली का प्रयोग किया गया तथा गुणात्मक विश्लेषण हेतु चयनित गद्यांश (हिंदी एवं अंग्रेज़ी) का वाचन एवं दिए गए प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए गए। तदुपरांत ‘निपुण भारत’ मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान के प्रति दृष्टिकोण को जानने हेतु 15 शिक्षकों का चयन सोद्देश्य विधि से किया गया तथा संरचित साक्षात्कार विधि का प्रयोग करके प्रदत्तों को संग्रहीत किया गया साथ ही शिक्षकों के दृष्टिकोण का गुणात्मक विश्लेषण का प्रयास इस शोध-पत्र में दिया गया है। प्रदत्तों के संख्यात्मक विश्लेषण हेतु टी-परीक्षण एवं कोहेन्स डी मान की गणना की गई है तथा गुणात्मक विश्लेषण हेतु थीमैटिक एनालिसिस एवं विषय-वस्तु विश्लेषण विधि का प्रयोग किया गया। शोध अध्ययन से ज्ञात हुआ कि प्राथमिक स्तर के छात्र एवं छात्राओं (विद्यार्थियों) की बुनियादी साक्षरता में कोई सार्थक अंतर नहीं है। यह शोध अध्ययन ‘निपुण भारत’ मिशन के अंतर्गत समावेशन एवं जेंडर समानता एवं मूल्य संवर्धन की अवधारणा को बल देता है तथा सांख्यिकीय आधार पर पुष्टि करता है कि छात्र और छात्राएँ समान शैक्षणिक क्षमता रखते हैं, जो ‘निपुण भारत’ मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप है। इस शोध अध्ययन से ज्ञात होता है कि समावेशी दृष्टिकोण के साथ ‘निपुण भारत’ मिशन सकारात्मक रूप से प्रतिफलित हो रहा और एक अधिक समतामूलक शिक्षा प्रणाली के निर्माण की ओर अग्रसर है। मानव सभ्यता का विकास एवं सांस्कृतिक परिमार्जन उसकी विवेकशीलता, बुद्धिमत्ता एवं सृजनशीलता का परिणाम है। बच्चे जन्म लेने के साथ ही शिक्षा द्वारा सुसंस्कारित होता जाता है, जो उसे सामाजिक रूप से उपयोगी बनाता है। शिक्षा बच्चे के व्यक्तित्व के अंतर्निहित गुणों का प्रकटीकरण करती है और मानवीय गुणों से परिपूर्ण करती है। शिक्षा स्वयं में साध्य तथा साधन दोनों है, क्योंकि यह मानव जीवन की यात्रा के आरंभ से अंत तक सतत प्रवाहित होती रहती है।