Journal Guidelines

संपादकीय – नीति

प्राथमिक शिक्षक’ में प्रकाशन हेतु भेजी जाने वाली पांडुलिपियाँ पूर्णतः मौलिक, अप्रकाशित और प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में किसी नवीन शोध, अध्ययन, अनुभव या नवाचार पर आधारित होनी चाहिए। लेखक का यह उत्तरदायित्व है कि वह अपने कार्य की मौलिकता को सुनिश्चित करे और यह भी घोषित करे कि प्रस्तुत पांडुलिपि किसी अन्य पत्रिका को एक साथ नहीं भेजी गई है। चूँकि यह जर्नल प्राथमिक विद्यालयों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों और शोधकर्ताओं के अनुभव-ज्ञान का महत्वपूर्ण मंच है, इसलिए विद्वत स्रोतों से लिए गए विचारों, डेटा अथवा तर्कों का उचित अकादमिक उद्धरण अनिवार्य है, ताकि कॉपीराइट संबंधी किसी प्रकार के उल्लंघन की संभावना न रहे।

यदि कोई पांडुलिपि किसी परियोजना, फील्ड-कार्य, संस्थागत असाइनमेंट या किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम पर आधारित है, तो लेखक को संबंधित विभाग या संस्था से अनुमति लेना आवश्यक है। यह तृतीय-पक्ष अधिकारों की रक्षा और नैतिक मानकों के पालन के लिए अनिवार्य है -विशेषकर तब, जब अध्ययन बच्चों, विद्यालयों या शिक्षकों के संवेदनशील अनुभवों से संबद्ध हो। लेखकों को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि उनकी पांडुलिपि के साथ व्यापक रूप से प्रयुक्त समरूपता रिपोर्ट तथा मौलिकता प्रमाणपत्र संलग्न हों, जिससे पत्रिका की शैक्षणिक गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे।

एकाधिक लेखकों द्वारा लिखित पांडुलिपियों के संदर्भ में संपादकीय समिति केवल अनुरूपी लेखक के साथ ही सभी प्रकार का पत्राचार और निर्णय-सूचना साझा करती है। पत्रिका में किसी भी पांडुलिपि का चयन कठोर Double Peer Review प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है, जिसमें विषय-विशेषज्ञ समीक्षक पांडुलिपि का गहन, निष्पक्ष और गोपनीय मूल्यांकन करते हैं। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रस्तुत कार्य शैक्षणिक दृष्टि से विश्वसनीय हो और प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में किसी ठोस योगदान का प्रतिनिधित्व करता हो।

पत्रिका में प्रकाशित लेख लेखक के निजी विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं; वे आवश्यक रूप से NCERT की आधिकारिक नीति या संपादकीय टीम के विचारों का प्रतिबिंब नहीं होते। पारदर्शिता और लेखक के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए संपादकीय समिति यह सुनिश्चित करती है कि पांडुलिपि का निर्णय यथासम्भव शीघ्र लिया जाए और समीक्षा-प्रक्रिया स्पष्ट एवं व्यवस्थित रूप से संचालित हो। पांडुलिपि प्राप्त होने पर शैक्षणिक संपादक द्वारा उसकी रसीद भेजना अनिवार्य है, जिससे लेखक को यह आश्वासन मिलता है कि उसका कार्य व्यवस्थित रूप से रिकॉर्ड और प्रक्रिया में सम्मिलित हो चुका है। अंतिम स्वीकृति के बाद पांडुलिपि को प्रकाशन-पूर्व प्रारूप में सुव्यवस्थित करते समय लेख का शीर्षक, लेखक/लेखकों के नाम, mail id और ORCID ID यथास्थान प्रदर्शित किए जाते हैं, जिससे पत्रिका की बौद्धिक पारदर्शिता और शैक्षणिक अनुशासन की भावना अक्षुण्ण बनी रहे।

समीक्षा नीति

‘प्राथमिक शिक्षक’ में प्रकाशित होने के लिए प्राप्त पांडुलिपियों का मूल्यांकन एक सुव्यवस्थित, कठोर और पारदर्शी द्वि-सहकर्मी समीक्षा (Double-Peer Review) प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। सबसे पहले पांडुलिपि संपादकीय समिति के पर्यवेक्षण में विषय-विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली ब्लाइंड स्क्रीनिंग से गुजरती है। इस चरण में पांडुलिपि की विषयगत उपयुक्तता, संरचनात्मक गुणवत्ता और लेखक द्वारा प्रस्तुत समानता-रिपोर्ट का परीक्षण किया जाता है। जो पांडुलिपियाँ प्रारंभिक जाँच में मानदंडों पर खरी उतरती हैं, वही आगे की समीक्षा-प्रक्रिया के लिए चयनित की जाती हैं।

चयनित पांडुलिपियों को ब्लाइंड रिव्यू के लिए दो स्वतंत्र समीक्षकों के पास भेजा जाता है। दोनों समीक्षक पांडुलिपि का मूल्यांकन पूर्ण गोपनीयता के साथ करते हैं और अपने विचार अकादमिक मानकों के आधार पर प्रस्तुत करते हैं। यदि दोनों समीक्षकों की टिप्पणियों में स्पष्ट असंगति पाई जाती है अर्थात् एक समीक्षक पांडुलिपि को सकारात्मक रूप से स्वीकार करता है जबकि दूसरा उसे अस्वीकृत करता है तो पांडुलिपि को एक तृतीय, वरिष्ठ समीक्षक को भेजा जाता है। यह तीसरा समीक्षक उच्च शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के आधार पर चयनित किया जाता है, और उसकी टिप्पणी को ही पांडुलिपि की अंतिम स्वीकृति अथवा अस्वीकृति का निर्णायक आधार माना जाता है।

समीक्षकों द्वारा प्रस्तुत टिप्पणियाँ, संशोधन-सुझाव या सुधार संबंधी अपेक्षाएँ आवश्यक होने पर लेखक को भेजी जाती हैं, ताकि वे अपने शोधकार्य में उपयुक्त सुधार कर सकें। समीक्षकों की सलाहों को समाहित करते हुए जब पांडुलिपि का संशोधित एवं अंतिम रूप प्रस्तुत किया जाता है, तभी उसे प्रकाशन हेतु स्वीकृत माना जाता है। ‘प्राथमिक शिक्षक’ पत्रिका का उद्देश्य पांडुलिपियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और प्राथमिक शिक्षा में उनके वास्तविक योगदान को अत्यंत गंभीरता के साथ सुनिश्चित करना है।

समीक्षक की जिम्मेदारियाँ

सहकर्मी समीक्षक ‘प्राथमिक शिक्षक’ की गुणवत्ता-निर्माण प्रक्रिया का एक अनिवार्य अंग हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे प्रस्तुत पांडुलिपियों पर निष्पक्ष, रचनात्मक, पारदर्शी और समयबद्ध प्रतिक्रिया दें। समीक्षा प्रक्रिया पूर्णतः गोपनीय होती है; अतः समीक्षक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह पांडुलिपि में निहित किसी भी सामग्री को समीक्षा-काल में साझा न करे और न ही किसी प्रकार से व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग करे। यदि किसी पांडुलिपि के संबंध में समीक्षक को कोई हितों का टकराव (Conflict of Interest) दिखाई देता है जैसे लेखक से व्यावसायिक, व्यक्तिगत या संस्थागत संबंध तो समीक्षा स्वीकार करने से पूर्व इसकी सूचना संपादकीय समिति को देना अनिवार्य है।

समीक्षक को पांडुलिपि की गुणवत्ता का मूल्यांकन केवल उसकी सामग्री, शोध-पद्धति, तर्क, निष्कर्षों और शैक्षणिक सुदृढ़ता के आधार पर करना चाहिए, न कि लेखक पर व्यक्तिगत टिप्पणी के आधार पर। समयबद्धता भी समीक्षा प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण तत्व है; अतः समीक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी समीक्षा प्रस्तुत करें, जिससे पत्रिका अपने प्रकाशन चक्र को सुव्यवस्थित रूप से बनाए रख सके।

समीक्षक को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सहकर्मी समीक्षा केवल मूल्यांकन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लेखक को बेहतर शोध प्रस्तुत करने में सहायता देने का माध्यम भी है। इसलिए समीक्षक की टिप्पणियाँ न केवल आलोचनात्मक हों, बल्कि रचनात्मक और दिशानिर्देशात्मक भी हों।

समीक्षक के लिए यह आवश्यक है कि वह COPE (Committee on Publication Ethics) द्वारा निर्धारित नैतिक दिशा-निर्देशों का पालन करे, जिनमें गोपनीयता, निष्पक्षता, वैज्ञानिक ईमानदारी, समयनिष्ठा और बौद्धिक सत्यनिष्ठा पर विशेष बल दिया गया है।

प्रकाशन नैतिकता

‘प्राथमिक शिक्षक’ पत्रिका अनुसंधान एवं प्रकाशन से सम्बद्ध सभी नैतिक मानकों का पूर्णतः पालन करती है। पत्रिका UGC तथा शिक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत COPE के सिद्धांतों एवं व्यवहार-मानदंडों का अनुसरण करती है। पत्रिका का प्रमुख उद्देश्य शैक्षणिक ईमानदारी की रक्षा करना, शोध की गुणवत्ता को सुनिश्चित करना तथा विद्वानों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए एक विश्वसनीय मंच प्रदान करना है।

इस पत्रिका में प्रकाशन हेतु प्रस्तुत पांडुलिपि पूर्णतः मौलिक, अप्रकाशित एवं लेखक के स्वयं के शोध या नवोन्मेष से उत्पन्न होनी चाहिए। जिन लेखों में किसी वित्तपोषण एजेंसी, संस्था या संगठन का सहयोग प्राप्त हुआ हो, उनमें लेखकों के लिए यह आवश्यक है कि वे इन संगठनों का विधिवत आभार-उल्लेख करें। किसी भी विद्वत स्रोत, पुस्तक, शोध या लेख से ली गई सामग्री का सटीक एवं उचित उद्धरण किया जाना अनिवार्य है, ताकि बौद्धिक संपदा के अधिकारों का सम्मान बना रहे।

समरूपता रिपोर्ट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्बन्धी नीति

पत्रिका में प्रस्तुत पांडुलिपि के साथ मान्य समरूपता रिपोर्ट तथा मौलिकता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की साहित्यिक चोरी चाहे वह प्रत्यक्ष हो, आंशिक हो या (Self-Plagiarism) अस्वीकार्य है और इसे शैक्षणिक दुराचार की श्रेणी में माना जाएगा। डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का प्रयोग सर्वव्यापी हो रहा है, इसलिए पत्रिका की यह स्पष्ट नीति है कि लेखक यदि AI का किसी भी प्रकार से उपयोग करते हैं जैसे भाषा-सहायता, प्रारूप मदद, अनुवाद, संगठनात्मक सहायता आदि तो इसका स्पष्ट उल्लेख पांडुलिपि में करना अनिवार्य है। AI-Generated Content को लेखक की ओर से सत्यापित, संशोधित और बौद्धिक रूप से स्वीकृत होना चाहिए। पूर्णतः AI-निर्मित लेख, अनुच्छेद, चित्र, सारणी, ग्राफ़ या विश्लेषण स्वीकार नहीं किए जाएंगे। लेखक पांडुलिपि की शैक्षणिक प्रामाणिकता, सटीकता, नैतिकता और मौलिकता के लिए पूर्णतः उत्तरदायी होंगे।

शोध नैतिकता एवं शुचिता

यदि शोध विद्यालयों, कक्षाओं, बच्चों, शिक्षकों या प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सम्बद्ध है, तो लेखक के लिए यह अनिवार्य है कि वे आवश्यक अनुमतियाँ जैसे अभिभावकीय सहमति, संस्थागत स्वीकृति, तथा डेटा-गोपनीयता सुनिश्चित करें। अध्ययन में प्रयुक्त सभी डेटा, सूचनाएँ एवं निष्कर्ष नैतिक शुचिता, पारदर्शिता और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार पर आधारित होने चाहिए।

दुराचार एवं अनैतिक आचरण (Ethics and Misconduct)

दुराचार के आरोप (Allegations of Misconduct)

पत्रिका किसी भी प्रकार के शैक्षणिक दुराचार को अत्यंत गंभीरता से लेती है। दुराचार की जांच उन सभी मामलों में की जाएगी जिनमें :

जैसी स्थितियाँ सम्मिलित हों। इन सभी मामलों की जांच संपादकीय समिति, COPE दिशानिर्देशों तथा संस्थागत नीतियों के अनुरूप की जाती है।

दुराचार की स्थिति में संभावित कार्रवाई (Action on Misconduct)

दुराचार की गंभीरता के आधार पर पत्रिका द्वारा निम्न में से एक या अधिक कार्यवाही की जा सकती है :

पत्रिका का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि शैक्षणिक सत्यनिष्ठा, नैतिकता और उच्च गुणवत्ता के मानकों की रक्षा करना है।

पारदर्शिता और श्रेष्ठ प्रथाएँ (Transparency and Best Practices)

पत्रिका पारदर्शिता एवं गुणवत्ता को सर्वोपरि मानते हुए अपनी सभी नीतियाँ अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करती है। इसमें लेखकीय दायित्वों, समीक्षा प्रक्रिया, प्रकाशन नैतिकता, संपादकीय बोर्ड एवं परामर्श समिति के सदस्यों की सूची तथा उनके संस्थागत संबद्धताओं का उल्लेख शामिल होता है। लेखक और समीक्षक दोनों के लिए स्पष्ट नैतिक दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जाते हैं। पत्रिका नियमित अंतराल पर अपनी नीतियों की समीक्षा करती है और शोध, तकनीक तथा प्रकाशन के बदलते मानकों के अनुरूप आवश्यक संशोधन करती रहती है। यह प्रक्रिया पत्रिका को आधुनिक शोध-परंपराओं के अनुकूल, अद्यतन और विश्वसनीय बनाए रखने में सहायक होती है।

सुधार, शिकायत तथा लेख-वापसी नीति

‘प्राथमिक शिक्षक’ पत्रिका शैक्षणिक सटीकता, नैतिक पारदर्शिता और बौद्धिक ईमानदारी को सर्वोच्च महत्व देती है। प्रकाशित सामग्री में यदि किसी प्रकार की त्रुटि, नैतिक चिंता या विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो पत्रिका त्वरित और उपयुक्त कार्यवाही सुनिश्चित करती है। सामान्य अथवा अल्प-महत्व की त्रुटियों को सुधार-सूचना के माध्यम से ठीक किया जाता है, जबकि गंभीर मुद्दों—जैसे साहित्यिक चोरी (Plagiarism), डेटा-फर्ज़ीकरण, शोध-पद्धति का उल्लंघन, या किसी कानूनी प्रावधान का अतिक्रमण - में आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लेख को वापस (Retraction) लिया जा सकता है।

समीक्षा प्रक्रिया, संपादकीय निर्णय, या किसी लेख के नैतिक आचरण से सम्बंधित शिकायतें लिखित रूप में प्रस्तुत की जानी चाहिए। ऐसी शिकायतों का परीक्षण निर्धारित समय-सीमा में संपादकीय समिति द्वारा किया जाता है, और शिकायतकर्ता को समाधान की सूचना औपचारिक रूप से प्रदान की जाती है।

पत्रिका द्वारा की गई प्रत्येक कार्रवाई - चाहे वह सुधार हो, स्पष्टीकरण हो, संपादकीय टिप्पणी हो या लेख-वापसी - वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है, ताकि पाठकों और शोधकर्ताओं को अद्यतन एवं पारदर्शी जानकारी उपलब्ध रहे। इस प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल त्रुटि-सुधार करना है, बल्कि पत्रिका की विश्वसनीयता, नैतिकता और शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाए रखना भी है।

पाठकों से प्राप्त प्रतिपुष्टि एवं सुझाव

‘प्राथमिक शिक्षक’ पत्रिका अपने पाठकों की सक्रिय सहभागिता को अत्यंत महत्त्व देती है। पाठकों को यह आमंत्रण एवं प्रोत्साहन दिया जाता है कि वे पत्रिका में प्रकाशित किसी भी सामग्री में यदि कोई त्रुटि, तथ्यगत असंगति, भ्रामक सूचना, अस्पष्टता, नैतिक चिंता अथवा कानूनी आपत्ति देखते हैं, तो उसे संपादकीय समिति के संज्ञान में अवश्य लाएँ।

प्राप्त प्रतिपुष्टि के आधार पर संपादकीय समिति यह सुनिश्चित करती है कि रिपोर्ट की गई त्रुटियों - चाहे वे तथ्यगत हों, व्याख्यात्मक हों, प्रस्तुति-संबंधी हों या किसी दुरुपयोग का संकेत देती हों - का परीक्षण किया जाए और आवश्यक होने पर सुधार अथवा स्पष्टीकरण जारी किया जाए।

किसी भी त्रुटि के सुधार हेतु जारी की गई सूचना पत्रिका के अगले मुद्रित अंक में प्रकाशित की जाएगी, जबकि डिजिटल संस्करण में उपयुक्त सुधार-टिप्पणी या फ़ुटनोट के माध्यम से अद्यतन किया जाएगा। यह प्रक्रिया पत्रिका की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और शैक्षणिक गंभीरता को बनाए रखने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।