प्रकाशित 2026-07-13
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सार
अध्यापक का स्थान शिक्षा प्रक्रिया के तीन प्रमुख अंगों— अध्यापक, विद्यार्थी व पाठ्यवस्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। एक अच्छा अभ्यास-शिक्षण (इंटर्नशिप) सदैव अपने प्रशिक्षणार्थियों में विशेष प्रशिक्षण कौशलों में निपुणता प्रदान करता है। शिक्षण कौशल शिक्षक के हाथ में वह शस्त्र है जिसका प्रयोग करके शिक्षक अपने कक्षा शिक्षण को प्रभावशाली तथा सक्रिय बनाने का प्रयास करता है तथा कक्षा की अंतःक्रिया में सुधार लाने का प्रयास करता है। इस शोधपत्र में विद्यार्थी-शिक्षकों में कौशलयुक्त शिक्षा प्राप्त करने एवं शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में प्रवीणता लाने में आने वाली विभिन्न समस्याओं एवं तत्संबंधी तथ्यों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। इस शोध अध्ययन की विधि सर्वेक्षण विधि है। इसमें उद्देश्यपूर्ण प्रतिदर्शन विधि का प्रयोग किया गया है। प्रतिदर्श के रूप में आम्रपाली इंस्टिट्यूट, हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड में सत्र 2021–2022 में अध्ययनरत बी.एड. के 73 विद्यार्थी-शिक्षकों का चयन किया गया। शोध उपकरण के रूप में शोधार्थी द्वारा स्वनिर्मित अभ्यास शिक्षण सूचना-पत्र का प्रयोग किया गया, जिसमें शिक्षण कौशलों के प्रयोग तथा उनके प्रयोग के समय उत्पन्न होने वाली समस्याओं से संबंधित प्रश्न थे। इस शोध अध्ययन में निष्कर्षतः पाया गया कि विद्यार्थी-शिक्षकों को अभ्यास-शिक्षण के दौरान शिक्षण कौशलों का प्रयोग करने में सर्वाधिक समस्या प्रस्तावना प्रश्न निर्माण से आती है। इसके अतिरिक्त प्रस्तावना प्रस्तुतीकरण में, कक्षा-कक्ष में बच्चों से, पाठ योजना प्रारूप का पालन करने में तथा आधुनिक तकनीकी की सुविधा से भी विद्यार्थी-शिक्षकों को समस्या का सामना करना पड़ता है। शिक्षण कौशलों के ज्ञान का अभाव व उनकी सभी जगह पर प्रस्तुतीकरण का पर्याप्त अभ्यास न होना भी समस्या उत्पन्न करता है। इन समस्याओं का मुख्य कारण पर्याप्त विषय ज्ञान का अभाव, आत्मविश्वास की कमी, प्रशिक्षण संस्थानों में योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, अभ्यास शिक्षण हेतु पर्याप्त समय न मिल पाना, क्योंकि संस्थान के पास प्रशिक्षण हेतु स्वयं के विद्यालय नहीं होते हैं, उन्हें इंटर्नशिप हेतु बाहर के विद्यालयों में जाना पड़ता है जहाँ पर पर्याप्त व व्यवस्थित प्रशिक्षण संपन्न कराना संभव नहीं हो पाता है।