खंड 46 No. 4 (2022): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा हेतु विद्या प्रवेश (रेडीनेस) कार्यक्रम की उपादेयता

डी. डी. गौतम
अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक–कुम्हेर, भरतपुर, राजस्थान

प्रकाशित 2026-07-13

सार

 

शिक्षा किसी समाज अथवा परिवेश में सदैव चलने वाली एक सामाजिक प्रक्रिया है। शिक्षा व्यक्ति को शिक्षित करती है और उनमें परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन की क्षमता विकसित करती है। शिक्षा नित्य विकासमान अवधारणा है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में शिक्षा के स्वरूप को और अधिक मूल्यपरक एवं प्रभावी बनाने के लिए सदैव सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। इसी आशय को ध्यान में रखकर वर्तमान शिक्षण व्यवस्था के संगठनात्मक ढाँचे में परिवर्तन करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया है जिसमें पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को एक मजबूत बुनियाद के रूप में स्वीकार किया गया है। इसमें इस बात की भी अनुशंसा की गई है कि बच्चों को खेल और गतिविधि-आधारित सीखने के साथ भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण प्रदान हो। प्रथम बार विद्यालय में प्रवेश लेने वाले बच्चों को कक्षा 1 में पूर्व-औपचारिक शैक्षणिक वातावरण से सामंजस्य स्थापित करने हेतु प्ले-आधारित स्कूल तैयारी कार्यक्रम (अंतरिम उपाय) को मिशन मोड पर तत्काल लागू करने की सिफारिश की है जिसे विद्या प्रवेश कार्यक्रम कहा गया है। यह रेडीनेस पैकेज के रूप में कक्षा 1 के शुरुआती तीन माह या 12 सप्ताह में पूर्ण किया जाना है जिसमें गतिविधियों एवं खेल-खेल के माध्यम से बच्चे बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक अवधारणा को सीखेंगे। ऐसे कौशल भी हासिल करेंगे जो प्रारंभिक स्तर पर सीखने के लिए एक ठोस नींव के निर्माण की दिशा में उपयोगी सिद्ध होंगे।