खंड 46 No. 2 (2022): प्राथमिक शिक्षक
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प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में अधिगम संवर्धन हेतु शिक्षण सहायक सामग्री की भूमिका

अशोक कुमार
असिस्टेंट प्रोफेसर, बी.एड. विभाग, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), डिफेंस कॉलोनी, नई दिल्ली – 110024
संदीप कुमार
असिस्टेंट प्रोफेसर, करिकुलम एंड पैडागॉजी विभाग, डाइट दरियागंज (DIET Daryaganj), दिल्ली

प्रकाशित 2026-07-13

सार

सभी बच्चों में जानने और समझने की एक अंतर्निहित प्रवृत्ति होती है। जानने की इसी प्रवृत्ति के कारण बालक अपने आस-पास के वातावरण से बहुत-सी बातों को स्वयं ही सीखता-समझता है। इस प्रकार से सीखने को शिक्षा के संदर्भ में अनौपचारिक रूप से सीखना कहा जाता है।

एक निश्चित आयु के बाद अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा की अपेक्षा के साथ प्राथमिक विद्यालय में दाखिला कराते हैं, जहाँ बच्चों को कुछ विशेष शिक्षण विधियों एवं तकनीकों के माध्यम से निश्चित पाठ्यक्रम को निर्धारित समय में पढ़ाया जाता है। जिसके फलस्वरूप बच्चों के संज्ञानात्मक, भावात्मक, क्रियात्मक आदि पक्षों का विकास होता है।

परंतु सामान्य अवलोकन से दिखाई देता है कि कक्षा-कक्ष की पढ़ाई को लेकर बच्चों का उत्साह सदैव एक जैसा नहीं बना रहता है। इसके फलस्वरूप या तो बालक प्राथमिक स्तर पर ही विद्यालय छोड़ देता है या शिक्षा को बोझ मानकर पढ़ाई करता है। इस प्रकार धीरे-धीरे बच्चों के सीखने की प्रवृत्ति में भी गिरावट दिखाई देती है।

इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली के विद्यालयों में प्राथमिक स्तर पर संचालित हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के संदर्भ में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया गया है और इस लेख के माध्यम से इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में अधिगम संवर्धन हेतु शिक्षण-सहायक सामग्री की भूमिका पर चर्चा की गई है।