प्रकाशित 2026-07-13
##submission.howToCite##
सार
शिक्षा न केवल एक मानव अधिकार है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता भी है। जीवन में ऐसे अनेक संदर्भ उपस्थित रहते हैं, जहाँ पढ़ने-लिखने और संख्या-ज्ञान संबंधी कुशलताओं का प्रयोग किया जाता है। फिर चाहे वह दुकान से राशन खरीदना हो या बैंक में पैसा जमा करना हो या बैंक से निकालना हो या फिर आमदनी का हिसाब-किताब रखना हो। ऐसे और भी संदर्भ हैं जहाँ असाक्षर व्यक्ति स्वयं को दूसरों पर निर्भर पाता है और एक तरह का संकोच, हीन भावना और स्वयं को पूर्णतः अक्षम समझने से ग्रसित रहता है।
ऐसे असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा एक केंद्र प्रायोजित योजना का प्रारंभ किया गया, जिसका नाम है— नव भारत साक्षरता कार्यक्रम। यह कार्यक्रम ‘उल्लास’ (ULLAS) नाम से लोकप्रिय है। उल्लास का पूरा अर्थ है— Understanding of Lifelong Learning for All in Society अर्थात समाज में सभी के लिए जीवनपर्यंत सीखने की समझ। इस योजना का उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आय के उन सभी स्त्री-पुरुषों, किशोर-किशोरियों को साक्षर बनाना है, जो किन्हीं कारणों से पढ़ना-लिखना और गणित नहीं सीख पाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का अध्याय 21 इसी ‘प्रौढ़ शिक्षा और जीवनपर्यंत सीखना’ (जिसे अब ‘सभी के लिए शिक्षा’ कहा गया है) को समर्पित है और 2030 तक पूर्ण साक्षर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की अनुशंसा करता है। यह नीति शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में देखते हुए स्पष्ट रूप से उल्लेख करती है कि “बुनियादी साक्षरता प्राप्त करना, शिक्षा प्राप्त करना और जीविकोपार्जन का अवसर प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। साक्षरता और बुनियादी शिक्षा किसी व्यक्ति के वैयक्तिक, नागरिक, आर्थिक और जीवनपर्यंत शिक्षा के अवसरों की एक नवीन दुनिया खोल देती है, जो व्यक्ति को निजी और पेशेवराना, दोनों ही स्तरों पर आगे बढ़ने में मदद करती है।”
इस अर्थ में शिक्षा व्यक्तिगत, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में उन्नति के लिए एक नितांत आवश्यक उपादान के रूप में दृष्टिगत होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ‘सभी के लिए शिक्षा’ के संदर्भ में मुख्य रूप से पाँच घटकों का उल्लेख करती है—
- बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान
- महत्वपूर्ण जीवन कौशल
- व्यावसायिक कौशल विकास
- बुनियादी शिक्षा
- सतत शिक्षा
इन पाँचों घटकों का अपना एक विशिष्ट महत्व है और आवश्यकता भी, क्योंकि बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान (एफ.एल.एन.) घटक व्यक्ति को पढ़ना-लिखना और गणित सीखने में सहायता करेगा, तो इसी साक्षरता के सहारे व्यक्ति अपनी आजीविका के लिए भी प्रयास करेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के दिशानिर्देश जीवन के महत्वपूर्ण जीवन कौशलों के माध्यम से बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान सीखने-सिखाने की बात करते हैं। डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, कानूनी साक्षरता, पर्यावरण संबंधी साक्षरता आदि ऐसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल हैं, जो पढ़ना-लिखना सीखने के विषय के रूप में कार्य करते हैं।
यह लेख जीवन के महत्वपूर्ण जीवन कौशलों के माध्यम से बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान सीखने-सिखाने की शिक्षणशास्त्रीय प्रक्रिया की पड़ताल करता है। ऐसे कौन-से बिंदु हैं जिन पर असाक्षर विद्यार्थी के साथ परस्पर संवाद आवश्यक है? संवाद की यह प्रक्रिया किस प्रकार से जानकारी भी देती है और पढ़ना-लिखना सीखने को सहज भी बनाती है? जीवन के महत्वपूर्ण जीवन कौशल से संबंधित सामग्री का क्या स्वरूप है? आदि।