प्रकाशित 2026-07-13
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सार
यह लेख पूर्व-प्राथमिक पाठशाला के बच्चों की बातचीत से रची गई कविताओं पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य बच्चों के मौखिक भाषायी विकास को बढ़ावा देने में बातचीत की भूमिका को रेखांकित करना है। लेख यह दर्शाता है कि बच्चे बिना किसी भय के और सहजता से अपने अनुभवों को कक्षा में साझा करते हैं।
अधिकतर बच्चे अपने अनुभवों, जिज्ञासाओं, अवलोकनों, अनुमानों, समझ, कल्पना और ज्ञान को विषयवस्तु के इर्द-गिर्द प्रस्तुत करते हैं। वे अपने पूर्वज्ञान को विभिन्न तरीकों से व्यक्त करते हैं, किंतु यह शिक्षक पर निर्भर करता है कि वह बच्चों के इस ज्ञान को किस प्रकार शैक्षणिक संरचना में समाहित करता है।
कविताएँ बच्चों की बातचीत, उनके अनुभवों, कार्य-कारण संबंधों, अवलोकन, तर्क तथा आशावादी दृष्टिकोण को उजागर करती हैं। बच्चे न केवल अवलोकन करते हैं, बल्कि अपनी समझ को दूसरों के साथ साझा भी करते हैं।
शिक्षकों, अभिभावकों तथा बच्चों के साथ कार्य करने वाले अन्य व्यक्तियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे बच्चों से सीखें और बच्चे उनसे सीखें। सीखने की प्रक्रिया में बच्चों की बातचीत को सहज और स्वाभाविक रूप से कक्षा तथा विद्यालयी वातावरण का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।