प्रकाशित 2026-07-13
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सार
शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक, सांस्कृतिक, भावनात्मक तथा बौद्धिक कौशलों का समग्र विकास करना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—बुनियादी स्तर (एनसीएफ-एफएस) 2022 ने प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ईसीसीई) को बच्चों के समग्र विकास की आधारशिला के रूप में मान्यता प्रदान की है।
इसी परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा की पाठ्यपुस्तकें ‘सारंगी’ और ‘वीणा’ विकसित की गई हैं। ये पाठ्यपुस्तकें चार-स्तंभीय भाषा-शिक्षण दृष्टिकोण पर आधारित हैं, जिसमें मौखिक भाषा, शब्द पहचान, पठन तथा लेखन को प्रमुख आधार बनाया गया है। इनका उद्देश्य बच्चों में भाषा-अधिगम को सहज, आनंददायक और प्रभावी बनाना है।
इन पाठ्यपुस्तकों में खेल-आधारित शिक्षण, रचनात्मक गतिविधियों, अनुभवात्मक अधिगम तथा पर्यावरणीय जागरूकता को विशेष महत्व दिया गया है। विभिन्न कहानियों, कविताओं, संवादों, चित्रों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित होती है।
‘सारंगी’ और ‘वीणा’ का उद्देश्य केवल भाषायी दक्षताओं का विकास करना नहीं है, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक कौशलों, सहयोग की भावना, संवेदनशीलता तथा रचनात्मक चिंतन का भी विकास करना है। ये पाठ्यपुस्तकें बच्चों को अपने परिवेश, संस्कृति और सामाजिक संदर्भों से जोड़ते हुए सीखने के अवसर प्रदान करती हैं।
प्रस्तुत अध्ययन ‘सारंगी’ और ‘वीणा’ को प्रारंभिक शिक्षा के लिए प्रभावी, समग्र और बाल-केंद्रित शिक्षण संसाधनों के रूप में प्रस्तुत करता है। ये पाठ्यपुस्तकें बच्चों में भाषायी दक्षताओं के विकास के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर, संवेदनशील, जागरूक और उत्तरदायी नागरिक बनने की दिशा में भी मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।
इस प्रकार, ‘सारंगी’ और ‘वीणा’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2022 की भावना के अनुरूप बच्चों के समग्र विकास, भाषा-सशक्तीकरण तथा जीवनोपयोगी कौशलों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।