खंड 48 No. 1 (2024): प्रा‍थमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा : अपेक्षाएँ, चुनौतियाँ और समाधान

अंजुली सुहाने
सहायक प्राध्यापक, शिक्षा विद्यापीठ, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली – 110068

प्रकाशित 2026-07-13

सार

प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ई.सी.सी.ई.) आजीवन सीखने के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार भारत में करोड़ों छोटे बच्चों, विशेषकर सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों, को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा उपलब्ध नहीं है।

वर्तमान 10+2 शैक्षिक संरचना में 3–6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे शामिल नहीं थे, क्योंकि औपचारिक विद्यालयी शिक्षा कक्षा 1 से, अर्थात लगभग छह वर्ष की आयु से प्रारंभ होती थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा प्रस्तावित नई 5+3+3+4 संरचना में अब तक औपचारिक विद्यालयी व्यवस्था से बाहर रहे 3–6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को भी शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत शामिल किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस नीति में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा की आवश्यकता, महत्व तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक प्रमुख लक्ष्य वर्ष 2030 तक उच्च गुणवत्ता वाली प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना है। इसके लिए आंगनवाड़ियों में प्रशिक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यबल विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है।

हालाँकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करना सरल नहीं होगा। इसके लिए आधारभूत संरचना, प्रशिक्षित मानव संसाधन, उपयुक्त शिक्षण-सामग्री, समुदाय की भागीदारी तथा विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

प्रस्तुत लेख में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से संबंधित पहलों के क्रियान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों तथा उनके सार्थक समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई है।