खंड 49 No. 1 (2025): प्राथमिक शिक्षक
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भारतीय ज्ञान परंपरा का संवहन करती ‘वीणा 1’

शारदा कुमारी
प्राचार्य (अवकाश प्राप्त), मॉडल शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, आर.के. पुरम, नई दिल्ली – 110066

प्रकाशित 2026-07-13

सार

भारतीय ज्ञान परंपरा ज्ञान का वह सूर्य है, जो विभिन्न विषय रूपी रश्मियों के माध्यम से समस्त समाज को आलोकित करता है। यह एक निर्मल, निश्चल, पवित्र निर्झरणी है, जिसमें देश के सहस्र नागरिकों की आस्था, मूल्य, आदर्श, दर्शन, संस्कृति, सभ्यता, कर्म तथा सभी जीवंत भावनाएँ समाहित हैं। यह परंपरा किसी एक तत्व या मूल्य को लेकर नहीं चलती, वरन् यह तो एक व्यापक विराट संचेतना है, जिसने अपने अंतस में भारत के कण-कण में समाहित ज्ञान को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे संवहित किया है। भारतीय ज्ञान परंपरा सूर्य की सहस्रों किरणों के समान अनंत प्रकाश वाली है। इसके ज्ञान की समस्त धाराएँ यदि औपचारिक विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था की शिक्षण-अधिगम सामग्री, विशेषकर पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को सुवासित करें, तो समस्त विद्यार्थी शक्ति को नवीन चेतना, जागरूकता और सजगता की ओर अग्रसर करने में सहायक सिद्ध होंगी। प्रस्तुत लेख राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा सृजित एवं प्रकाशित कक्षा 3 की हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा 1’ में समाहित भारतीय ज्ञान परंपरा की सोदाहरण विवेचना प्रस्तुत करता है।