Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अनुभव आधारित अधिगम की अनुशंसा करती है। अनुभव आधारित अधिगम के माध्यम से हम अपने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान एवं आत्मनिर्भरता का विकास कर सकते हैं।
इस शोध का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अनुमोदित अनुभव आधारित अधिगम के संदर्भ में विद्यालय स्तर पर पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम और कक्षा-कक्ष में शिक्षक द्वारा अपनाई जाने वाली शिक्षण-अधिगम प्रविधि के बारे में विद्यार्थी-शिक्षकों के दृष्टिकोण का अध्ययन करना था, ताकि शिक्षक शिक्षा व विद्यालय स्तर पर इनके क्रियान्वयन के लिए उचित कदम उठाए जा सकें और आवश्यक सुधार कर हम एक नई पाठ्यचर्या या पाठ्यक्रम के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
इस शोध के लिए दिल्ली डाइट (मंडलीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) के प्रथम वर्ष के 70 विद्यार्थी-शिक्षकों को दैव निदर्शन विधि द्वारा चुना गया। इस शोध के लिए खुली व बंद राय वाली एक स्वनिर्मित प्रश्नावली का प्रयोग किया गया।
शोध में पाया गया कि अधिकतर (90 प्रतिशत) विद्यार्थी-शिक्षक करके सीखने या प्रयोगात्मक तरीके से सीखने को ही अनुभव आधारित अधिगम समझते हैं, जबकि 41 प्रतिशत विद्यार्थी-शिक्षकों ने माना कि दूसरों के अनुभवों से भी सीखना अनुभव आधारित अधिगम होता है।
71 प्रतिशत विद्यार्थी-शिक्षकों के अनुसार विद्यालय स्तर पर उनके अध्यापकों द्वारा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान व्याख्यान एवं सैद्धांतिक पारंपरिक विधि का प्रयोग सबसे अधिक किया गया। केवल 29 प्रतिशत विद्यार्थी-शिक्षकों ने बताया कि उनके अध्यापकों द्वारा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान करके सीखना, प्रयोगात्मक विधि, अनुभव आधारित विधि, क्रियात्मक या समस्या-समाधान जैसी विधियों का प्रयोग किया गया।
83 प्रतिशत विद्यार्थी-शिक्षक मानते हैं कि अनुभव आधारित अधिगम सबसे उत्तम है। 84 प्रतिशत विद्यार्थी-शिक्षक मानते हैं कि प्रयोगात्मक व अनुभवात्मक अधिगम कला, विज्ञान, गणित और कार्यानुभव आदि जैसे प्रयोगात्मक विषयों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे अन्य विषयों में भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।