Vol. 48 No. 4 (2024): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला शिक्षा : एक परिप्रेक्ष्य

सुष्मिता लखयानी
अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, केंद्रीय शिक्षा संस्थान, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली – 110007

Published 2026-07-13

How to Cite

लखयानी स. (2026). राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला शिक्षा : एक परिप्रेक्ष्य. प्राथमिक शिक्षक, 48(4), p.101-110. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5520

Abstract

भारत की शिक्षा पद्धति में कला शिक्षा पर विचार-विमर्श समय के साथ और परिपक्व हुआ है और अब नीतिगत परिवर्तनों में इसे महत्वपूर्ण स्थान मिल रहा है। पूर्व की नीतियाँ जहाँ कला को मुख्यतः सृजनात्मकता और आत्म-अभिव्यक्ति के लिए मूल्यवान मानती थीं, वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) 2020 ने इसे अपने शैक्षिक ढाँचे का एक अभिन्न अंग मानते हुए केंद्र में स्थापित किया है। एन.ई.पी. 2020 ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाते हुए कला और विज्ञान, पाठ्यक्रम और पाठ्येतर गतिविधियाँ तथा व्यावसायिक और शैक्षणिक धाराओं के बीच जो कठोर भेद पहले विद्यमान था, उसे अब समाप्त कर दिया है। यह नीति संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक क्षमताओं को विकसित करने में कला के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करती है। वर्तमान शोध का मुख्य उद्देश्य भारत में एन.ई.पी. 2020 के परिप्रेक्ष्य में कला शिक्षा के निहितार्थों पर एक सार्थक चर्चा को जन्म देना है। एन.ई.पी. 2020 भारतीय शिक्षा प्रणाली के संपूर्ण रूपांतरण के लिए एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जिसमें शिक्षा के सभी स्तरों पर रचनात्मक कलाओं पर आधारित एक व्यापक शिक्षाशास्त्र को समाहित किया गया है। प्रस्तुत शोधपत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कलात्मक शिक्षा को विषयवस्तु एवं शिक्षण पद्धति दोनों ही स्वरूपों में समाहित करने संबंधी नियमों एवं उपबंधों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। साथ ही, यह विभिन्न शैक्षिक सुधारों में नीतिगत उपागमों के माध्यम से कला शिक्षा के सूक्ष्म विचारों का भी परिशीलन करता है। गुणात्मक अनुसंधान पद्धति का अवलंबन करते हुए, यह अध्ययन भारत में कला शिक्षा के क्रमिक विकास का पता लगाने हेतु नीति दस्तावेजों, पुस्तकों तथा शोध लेखों जैसे गौण स्रोतों पर आधारित है। विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 से स्पष्ट, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कला शिक्षा को एक समावेशी, समतामूलक एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रणाली में रूपांतरित करने का संकल्प रखती है। इस शोधपत्र का मुख्य ध्येय भारत के शैक्षिक संवाद में कला शिक्षा के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक निहितार्थों पर नीति-निर्धारकों, शिक्षकों तथा समुदाय के मध्य गहन विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करना है, सृजनात्मकता, समालोचनात्मक चिंतन एवं सांस्कृतिक बोध को संवर्धित करने में इसकी महत्ता को रेखांकित करना है।