Vol. 48 No. 3 (2024): प्राथमिक शिक्षक
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अनुसूचित जनजाति-केंद्रित क्षेत्रों में विद्यालयी कामकाज में सुधार हेतु सामुदायिक भागीदारी के योगदान का अवलोकन और विश्लेषण

आयुषी सिंह
सीनियर रिसर्च एसोसिएट, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, बी–4/59, सफदरजंग एन्क्लेव, नई दिल्ली – 110029
वीरेंद्र प्रताप सिंह
आचार्य, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, श्री अरविंद मार्ग, नई दिल्ली – 110016

Published 2026-07-13

How to Cite

सिंह आ., & सिंह व. प. (2026). अनुसूचित जनजाति-केंद्रित क्षेत्रों में विद्यालयी कामकाज में सुधार हेतु सामुदायिक भागीदारी के योगदान का अवलोकन और विश्लेषण. प्राथमिक शिक्षक, 48(3), p.110-119. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5501

Abstract

इस शोध अध्ययन का उद्देश्य विद्यालय के कार्यकलापों और समग्र कामकाज में सुधार के लिए जन-समुदाय के योगदान का गहन अवलोकन एवं विश्लेषण करना था। यह अध्ययन Meghalaya के Ri-Bhoi District के मबोंग ब्लॉक के ग्रामीण एवं आदिवासी-बहुल क्षेत्र में आयोजित किया गया।

अध्ययन के लिए यादृच्छिक रूप से 25 विद्यालयों का चयन किया गया, जिनमें सामुदायिक भागीदारी के विभिन्न स्वरूपों और उनके योगदान का अवलोकन एवं विश्लेषण किया गया। विद्यालय के कार्य-निष्पादन पर जन-समुदाय के प्रभाव का आकलन करने के लिए मात्रात्मक एवं गुणात्मक दोनों प्रकार के आँकड़ों का संग्रह और विश्लेषण किया गया।

इस अध्ययन में विद्यालय के कार्यकलापों में समुदाय के योगदान का मूल्यांकन विभिन्न पहलुओं के आधार पर किया गया, जैसे— विद्यालय का स्थान, पेयजल की उपलब्धता, शौचालय सुविधाएँ, कक्षागत सुविधाएँ, विद्यालयीय प्रावधान तथा मानव संसाधनों की निगरानी एवं प्रबंधन।

अध्ययन से यह ज्ञात हुआ कि जन-समुदाय ने विद्यालयों के विकास में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। इनमें शिक्षाकर्मियों की व्यवस्था, जलापूर्ति सुनिश्चित करना तथा आधारभूत अवसंरचना के विकास में सहयोग जैसे प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय पाए गए। ये पहलें समुदाय की विद्यालयों के प्रति प्रतिबद्धता और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

हालाँकि, कुछ अन्य क्षेत्रों में सामुदायिक सहभागिता का प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित पाया गया। अध्ययन यह संकेत देता है कि इन क्षेत्रों में जन-जागरूकता, सहभागिता और उत्तरदायित्व को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है।

शोध के निष्कर्ष यह भी दर्शाते हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर जो बल दिया गया है, उसके अनुरूप भविष्य में विद्यालय और समुदाय के बीच अधिक सशक्त साझेदारी विकसित की जा सकती है। इससे विद्यालयों के शैक्षिक वातावरण, संसाधनों की उपलब्धता तथा विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में और अधिक सुधार संभव होगा।

इस प्रकार, अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए जन-समुदाय की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इसके सुदृढ़ीकरण की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।