Vol. 48 No. 2 (2024): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारतीय भाषा शिक्षण

प्रभाकर कुमार
शोधार्थी, हिंदी विभाग, हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद, तेलंगाना – 500046

Published 2026-07-13

How to Cite

कुमार प. (2026). राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारतीय भाषा शिक्षण. प्राथमिक शिक्षक, 48(2), p.64-68. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5466

Abstract

भाषा के बिना किसी भी समाज की कल्पना करना संभव नहीं है, क्योंकि भाषा के माध्यम से ही मनुष्य अपने विचारों का आदान-प्रदान करता है। भाषा कला और संस्कृति से अटूट रूप से जुड़ी हुई है। किसी भी भाषा में संवाद लोगों के बीच अपनत्व और सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ बनाता है।

जब तक किसी व्यक्ति में भाषा का समुचित विकास नहीं होता, तब तक उसका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। इसलिए भाषा का विकास अत्यंत आवश्यक है। किंतु यह तभी संभव है, जब भाषा का शिक्षण प्रभावी एवं सार्थक ढंग से किया जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में यह चिंता व्यक्त की गई है कि अनेक भारतीय भाषाएँ, विशेषकर वे भाषाएँ जिनकी अपनी लिपि नहीं है, विलुप्त होने के कगार पर हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रभावी शिक्षण की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

प्रस्तुत आलेख में इन्हीं महत्वपूर्ण बिंदुओं को केंद्र में रखकर चर्चा की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की संस्तुतियों के आलोक में यह विचार किया गया है कि भारतीय भाषाओं का शिक्षण किस प्रकार अधिक प्रभावी, समावेशी और व्यवहारिक बनाया जा सकता है।

भारतीय भाषाओं के माध्यम से न केवल विद्यार्थियों की भाषायी दक्षताओं का विकास किया जा सकता है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता तथा सामाजिक जुड़ाव को भी सुदृढ़ किया जा सकता है। इसलिए भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ उनके गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।