Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
“देश का निर्माण इसकी कक्षा-कक्ष में हो रहा है।” — कोठारी आयोग (1964–66)
कोठारी आयोग (1964–66) की इस संकल्पना से यह सुनिश्चित होता है कि शिक्षा का महत्व बच्चों के लिए केवल महत्वपूर्ण ही नहीं, बल्कि अनिवार्य भी है, क्योंकि बच्चे ही समाज के भावी निर्माता होते हैं। यदि बच्चों की शिक्षा व्यवस्थित एवं सुचारु रूप से संपन्न की जाती है, तो निश्चित रूप से वे एक अच्छे, सुव्यवस्थित समाज और राष्ट्र के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।
इस प्रकार, चाहे अच्छे समाज के निर्माण की बात हो अथवा बच्चों के सार्वभौमिक विकास की, शिक्षा और शिक्षण के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता। शिक्षा एवं शिक्षण प्रक्रिया में बच्चों की भावनाओं, विचारों तथा उनकी अंतर्निहित शक्तियों की अभिव्यक्ति में भाषा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
भाषा बच्चों के सर्वांगीण विकास का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिसके माध्यम से उनके सृजनात्मक, आलोचनात्मक, अपसारी तथा अभिसारी चिंतन का विकास किया जाता है। यहाँ तक कि कोठारी आयोग (1964–66) ने भी त्रिभाषा सूत्र की सिफारिश की थी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भाषा के अनुभव-आधारित अधिगम संवर्धन को विशेष महत्व प्रदान किया है।
प्रभावी अधिगम संवर्धन में अनुभव का विशिष्ट महत्व होता है। प्रारंभ से ही ‘करके सीखने’ (Learning by Doing) पर विशेष बल दिया गया है और इसी दृष्टिकोण ने भाषा-शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व एवं क्रांतिकारी परिवर्तन लाए हैं।
बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में अनुभवात्मक गतिविधियाँ अधिगम संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अनुभव-आधारित अधिगम बच्चों को सैद्धांतिक विषयवस्तु की गहन समझ विकसित करने, भाषायी कौशलों का विकास करने तथा वास्तविक दुनिया के प्रत्यक्ष अनुभवों और शैक्षिक अधिगम के बीच सामंजस्य स्थापित करने में सहायता प्रदान करता है।