Vol. 47 No. 4 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (बुनियादी स्तर) 2022 में बच्चों के पंचकोशीय विकास की संकल्पना

ज्ञानेन्द्र कुमार
असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षा विभाग (सी.आई.ई.), दिल्ली विश्वविद्यालय – 110007

Published 2026-07-13

How to Cite

कुमार ज. (2026). राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (बुनियादी स्तर) 2022 में बच्चों के पंचकोशीय विकास की संकल्पना. प्राथमिक शिक्षक, 47(4), p.74-82. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5430

Abstract

किसी भी समाज की समृद्धि के आकलन के अनेक मानदंड हो सकते हैं, जैसे— स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा, उस समाज विशेष की आर्थिक प्रगति, वैश्विक स्तर पर उसकी पहचान, जी.डी.पी., तथा आंतरिक और बाह्य सुरक्षा हेतु किए जा रहे प्रयास इत्यादि।

किन्तु ये सभी मानदंड तब तक किसी समाज का सही आकलन नहीं कर सकते, जब तक उस समाज या राष्ट्र में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु उचित एवं आवश्यक अवसर उपलब्ध न हों। साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि वह समाज व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के विषय में क्या सोचता है तथा उसके समग्र विकास हेतु किस प्रकार की योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन कर रहा है।

जब तक इन पहलुओं का समुचित मूल्यांकन न किया जाए, तब तक किसी समाज की समृद्धि का सही आकलन संभव नहीं है। व्यक्ति के समग्र विकास में ही राष्ट्र की प्रगति निहित है। इसी कारण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन हेतु निर्मित राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—बुनियादी स्तर (एन.सी.एफ.-एफ.एस.) 2022 में बच्चों के समग्र विकास पर व्यापक चर्चा की गई है।

इस समग्रता की अवधारणा का आधार तैत्तिरीय उपनिषद का पंचकोशीय सिद्धांत है। इस संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न स्वाभाविक रूप से उभरते हैं— पंचकोश की अवधारणा क्या है? क्या पंचकोशों के विकास के माध्यम से बच्चों का समग्र विकास संभव है? और इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि अध्यापक कक्षा में किस प्रकार की योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन करें, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

प्रस्तुत आलेख में इन सभी प्रश्नों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई है।