Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
इस तथ्य को सभी स्वीकार करते हैं कि मनुष्य के जीवन के शुरुआती वर्ष बड़े ही महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में भावी विकास और ज्ञान की नींव रखी जाती है। इन वर्षों में बच्चों पर हर बात का गहरा असर होता है। बच्चों को इस अवधि में सर्वाधिक देख-रेख, सावधानी और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। अतः प्रारंभिक बाल-देखभाल एवं शिक्षा केंद्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समुचित वातावरण प्रदान करने की आवश्यकता होती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने बुनियादी स्तर की शिक्षा पर विशेष बल दिया है। विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने एक नया ढाँचा दिया है ‘5+3+3+4’, जिसमें पहले पाँच वर्ष में तीन से चार, चार से पाँच और पाँच से छह साल के बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा, जिसे बालवाटिका या पूर्व-प्राथमिक शिक्षा कहा जाता है, को अहम बताया है।
साथ ही बालवाटिका को कक्षा एक और दो (6–8 वर्ष) के साथ जोड़कर एक इकाई के रूप में देखा गया है। एक अध्यापक के लिए इस आयु-अवधि के बच्चों के मनोविज्ञान और बाल विकास की प्रक्रिया को समझना आवश्यक है।
इस लेख में बालवाटिका के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बाल विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। उनके शारीरिक विकास, भाषायी कौशलों के विकास, संज्ञानात्मक विकास तथा भौतिक पर्यावरण-संबंधी पहलुओं को विकसित करने हेतु कैसी क्रियाएँ करवाई जाएँ, सुझाई गई हैं।
साथ ही कठपुतली कैसे बनाएँ व उनका प्रयोग कक्षा में किस प्रकार करें, इन बिंदुओं पर भी चर्चा की गई है।
हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सुझावों पर बुनियादी स्तर की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2022 का निर्माण किया गया है। लेख में शामिल गतिविधियाँ और सुझाव इस पाठ्यचर्या को कक्षा में क्रियान्वित करने हेतु तथा उन्हें ज़मीनी स्तर पर लागू करने की ओर भी अग्रसर करते हैं।