Vol. 49 No. 1 (2025): प्राथमिक शिक्षक
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शिक्षा की नींव—सीखने के कौशल और प्रतिफल की समझ

पद्मा यादव
प्रोफेसर, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली – 110016

Published 2026-07-13

How to Cite

यादव प. (2026). शिक्षा की नींव—सीखने के कौशल और प्रतिफल की समझ. प्राथमिक शिक्षक, 49(1), p.15-23. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5288

Abstract

बचपन व्यक्ति के संपूर्ण विकास की आधारशिला है। यह वह अवस्था होती है जब बच्चे अपने परिवेश से सीखते हैं, भाषा को समझते हैं, सामाजिक व्यवहार अपनाते हैं तथा विभिन्न कौशलों का विकास करते हैं। शिक्षा के इस बुनियादी स्तर पर बच्चों के सीखने के कौशल और उनसे प्राप्त होने वाले प्रतिफलों को समझना शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बुनियादी स्तर की शिक्षा से आशय उन प्रारंभिक वर्षों की शिक्षा से है, जो पूर्व-प्राथमिक (3–6 वर्ष) तथा प्राथमिक (कक्षा 1–2) स्तर तक विस्तृत होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसे ‘बुनियादी स्तर’ के रूप में परिभाषित किया गया है। इस चरण में बच्चों का अधिगम अनुभवों, गतिविधियों और खेलों के माध्यम से होता है।

सीखने के कौशल बच्चों को शिक्षा और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए तैयार करते हैं, जबकि सीखने के प्रतिफल यह दर्शाते हैं कि बच्चों ने उन कौशलों को किस सीमा तक अर्जित किया है तथा वे उन्हें व्यवहारिक जीवन में किस प्रकार उपयोग करते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों को जीवनोपयोगी एवं व्यावहारिक कौशलों से भी सशक्त बनाना है।

सीखने के कौशलों का विकास और सीखने के प्रतिफलों का निरंतर मूल्यांकन यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे प्रभावी ढंग से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। यदि अधिगम में किसी प्रकार की कठिनाई अनुभव होती है, तो उसे समय रहते दूर किया जा सकता है। यह लेख इन्हीं महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित है।