Published 2026-07-13
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Abstract
भाषा अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है, जो मानव के विचार, भावों को संप्रेषण का रूप देती है। विद्यार्थियों की सहज व सशक्त अभिव्यक्ति ही आगे की नींव को मजबूत बनाती है, जो प्रभावशाली भाषा-शिक्षण से ही संभव है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के अनुसार भाषा कौशलों के पुंज के रूप में, चिंतन और अस्मिता के रूप में स्कूल के सभी विषयों में मौजूद है। बोलना और सुनना, पढ़ना और लिखना सभी सामान्य कौशल हैं और उनमें बच्चों की दक्षता, स्कूल में उनकी सफलता को प्रभावित करती है। कई स्थितियों में इन सभी कौशलों को एक साथ उपयोग में लाने की ज़रूरत होती है। सभी विषयों को सीखने एवं सिखाने में भाषा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक विद्यालयी पाठ्यक्रमों में निर्धारित विषयों के अंतर्गत मुख्य भाषायी आयामों को कक्षा शिक्षण व्यवहार में अपना कर विद्यार्थियों की सहज व सशक्त अभिव्यक्ति को विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों को पढ़ाने हेतु शिक्षकों में पाठ्यक्रम में भाषा जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश विद्यार्थियों में भाषायी कौशलता, सहज अभिव्यक्ति, संप्रेषण तथा सृजनात्मकता की समस्या आज भी बनी हुई है। इन समस्याओं का निदान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भाषा शिक्षण की प्रखरता ही सभी विषयों के ज्ञान को प्रभावित करती है। कक्षा में शिक्षक इस लेख में दिए गए भाषायी आयामों को अपने शिक्षण के दौरान अपना सकते हैं। प्रस्तुत लेख पाठ्यक्रम में भाषायी आयामों को उजागर किया गया है।