Vol. 46 No. 3 (2022): प्राथमिक शिक्षक
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प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा लक्ष्य, चुनौतियाँ और अवसर

रिंकू कुमारी
सहायक प्राध्यापक, बी.एड. विभाग, डोरंडा कॉलेज, राँची

Published 2026-07-13

How to Cite

कुमारी र. (2026). प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा लक्ष्य, चुनौतियाँ और अवसर. प्राथमिक शिक्षक, 46(3), p.31-37. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5569

Abstract

शिक्षा प्रत्येक बच्चे का बुनियादी अधिकार है। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का उद्देश्य जन्म से 6 वर्ष की आयु तक के बच्चों की समग्र रूप से बुद्धि विकास और उनके शिक्षण को प्रोत्साहित करना है। देखभाल का अर्थ है, बच्चों को सुरक्षित परिवेश उपलब्ध कराते हुए उसके स्वास्थ्य, साफ-सफाई और पोषण पर ध्यान देना। वैश्विक स्तर पर प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। आजादी के बाद भारत में भी इस पर जोर दिया गया है। इसके लिए भारत सरकार ने नीति, कानून और योजनाएँ बनाई हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ई.सी.सी.ई.) की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, सामाजिक न्याय व सशक्तिकरण मंत्रालय हैं, जो 0–6 वर्ष तक के बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा को पहुँचाए एवं बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करें। समेकित बाल विकास सेवा (आई.सी.डी.एस.) की स्थापना आँगनबाड़ी केंद्रों के देखरेख के लिए की गई है। साथ ही जिला प्राथमिक कार्यक्रम (डी.पी.ई.पी.) सर्वशिक्षा अभियान बच्चों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए की गई। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण देश के कोने-कोने तक पहुँचाने में बहुत-सी बाधाएँ, मुद्दे और चुनौतियाँ हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में लक्ष्य रखा गया है कि पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से उच्चतर गुणवत्ता वाले ई.सी.सी.ई. संस्थानों के लिए सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित हो। इस शोध-पत्र को प्रस्तुत करने का उद्देश्य है कि सरकार द्वारा ई.सी.सी.ई. के क्षेत्र में की गई पहल को बताना। साथ ही आँगनबाड़ी केंद्रों का ई.सी.सी.ई. में योगदान और 2020 में ई.सी.सी.ई. से संबंधित लक्ष्य, चुनौतियाँ और अवसरों को बताना।