Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
शिक्षण किसी भी विषय का हो यह जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। जीवन में परस्पर विचाराभिव्यक्ति और भावसंप्रेषण के लिए भाषा की आवश्यकता होती है। भाषा एक ऐसा औजार है जो मनुष्य को अन्य सभी प्राणियों से बेहतर अभिव्यक्ति क्षमता प्रदान करता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और भाषा उसकी सामाजिक जरूरतों को पूरा करने का एक सर्वाधिक उपयोगी माध्यम है। जब हम प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण की बात करते हैं तो कहीं न कहीं शिक्षार्थी के शब्द-संसार, परिवेश और उसकी क्षमताओं के संवर्धन को विशेष महत्व देते हैं। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 (एन.सी.एफ. 2005) में जिन बिंदुओं पर विस्तार से विचार किया गया है, उनकी सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए ही रा.शै.अ.प्र.प. ने भाषा, पर्यावरण, गणित आदि विषयों की पाठ्यपुस्तकों की निर्मिति की है। एन.सी.एफ. 2005 की सिफारिशों को और अधिक विस्तार से मजबूती देने की बात हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 करती है। इसका प्रमाण हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधार सिद्धांत की इन पंक्तियों में देखते हैं “शैक्षिक प्रणाली का उद्देश्य अच्छे इंसानों का विकास करना है, जो तर्कसंगत विचार और कार्य करने में सक्षम हों, जिसमें करुणा और सहानुभूति, साहस और लचीलापन, वैज्ञानिक चिंतन और रचनात्मक कल्पनाशक्ति, नैतिक मूल्य और आधार हों। इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादक लोगों को तैयार करना है जो कि अपने संविधान द्वारा परिकल्पित–समावेशी और बहुलतावादी समाज के निर्माण में बेहतर तरीके से योगदान करें।” इस आधारभूत सिद्धांत के आलोक में हम देखें तो पाएँगे कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने विद्यालयी शिक्षा और विशेषकर जो प्राथमिक शिक्षा है उसे अत्यधिक महत्वपूर्ण माना है और यह उचित भी है।