Vol. 46 No. 4 (2022): प्राथमिक शिक्षक
Articles

आरंभ अच्छा तो सब अच्छा

सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त
शोधार्थी, उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद – 500007

Published 2026-07-13

How to Cite

उरतृप्त स. क. म. (2026). आरंभ अच्छा तो सब अच्छा. प्राथमिक शिक्षक, 46(4), p.5-11. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5544

Abstract

 

वेदों में बताया गया है कि माँ पहली गुरु, उसकी गोदी पहली कक्षा और घर पहली पाठशाला होती है। अनौपचारिक रूप से सीखने के इस विधान से निकलकर बच्चे जब पहली-पहली बार औपचारिक शिक्षा के अंतर्गत स्कूली जीवन में कदम रखते हैं, तो उनके समक्ष अनेक चुनौतियाँ मुँह बाए खड़ी रहती हैं, जैसे— नए-नए लोगों से सामंजस्य स्थापित करना, नए परिवेश में स्वयं को ढालना आदि। आरंभिक कक्षा के शिक्षक के सामने अनेक चुनौतियाँ होती हैं। पाठशालाई दुनिया में पहली-पहली बार कदम रखने वाले बच्चों को पाठशाला में बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। यदि अध्यापिका कुछ बातों के प्रति सजग रहे तो वह इन चुनौतियों का सामना कर सकती है। आरंभिक शिक्षा, अध्यापिका का व्यवहार और सीखने-सिखाने की प्रक्रिया कैसी हो, इन सबके बारे में यहाँ चर्चा की गई है।